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Sunday, 12 November 2017

ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़ किसी अपने का दामन...

ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़ किसी अपने का दामन... 



बहुत ही अच्छी स्टोरी है कृपया जरूर पढ़ें

.

एक जौहरी के निधन के बाद उसका

परिवार संकट में पड़ गया।😂😂

,

खाने के भी लाले पड़ गए।😇

,

एक दिन उसकी पत्नी ने अपने 💃बेटे

को नीलम का एक हार

देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की

दुकान पर ले जाओ।😂

,

कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।😛

,

💃बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।

,

👳चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख

परखकर कहा- बेटा,

मां से कहना कि अभी बाजार

बहुत मंदा है।😍

,

थोड़ा रुककर बेचना,

अच्छे दाम मिलेंगे।😍

,

उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि

तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।😁😁

,

अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान

पर जाने लगा और वहां हीरों

रत्नो की परख का काम सीखने लगा।😍😍

,

एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।

लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने

आने लगे।😍😍

,

एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी

मां से वह हार लेकर आना और कहना

कि अब बाजार बहुत तेज है,😍😍

,

उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।😁

,

मां से हार लेकर उसने परखा तो

पाया कि वह तो नकली है।😇😂

,

वह उसे घर पर ही छोड़ कर

दुकान लौट आया।😂😂

,

👳चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?

,

उसने कहा, वह तो नकली था।😊😍

,

तब 👳चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार

हार लेकर आये थे, तब मैं उसे

नकली बता देता तो तुम सोचते कि

आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा

हमारी चीज को भी नकली

बताने लगे।😍

,

आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो

पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।😍

,

सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में


हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं,

सब गलत है।😛😂

,

और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार

होकर रिश्ते बिगडते है।

Think and Live Long Relationship

ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़

किसी अपने का दामन.😇

,

ज़िंदगी बीत जाती है

अपनो को अपना बनाने में.😇

👉अगर ये कहानी आपका दिल छु गई तो बिना पोस्ट शेयर किये बिना मत रहिएगा।।

😍

Sunday, 5 November 2017

एक छोटे से गावं में एक बच्चा lala रहता था...

एक छोटे से गावं में एक बच्चा lala रहता था...

 

.

.
उसके स्कूल के बच्चे उसको हमेशा "उल्लू"बोलकर
चिढ़ाते थे...
.
.
और उसकी टीचर उस की बेवकूफियों से हमेशा
बहुत
परेशान रहती थी।
.
.
एक दिन उसके पिता उसका
रिजल्ट जानने उसके स्कूल गये और टीचर से lala
के बारे में पूछा
.
.
टीचर ने कहा कि "अपने जीवन के पच्चीस साल
के कार्यकाल में उसने पहली बार ऐसा बेवकूफ
लड़का देखा है, ये जीवन में कुछ न कर पायेगा" .
.
यह सुनकर lala के पिता बहुत
आहत हो गये और उसने शर्म के मारे वो गाँव
छोड़कर एक शहर में चले
गये.. .
.
बीस साल बाद जब उस टीचर
को दिल की बीमारी हुई तो सबने उसे शहर के
एक डॉक्टर का नाम सुझाया जो ओपन हार्ट
सर्जरी करने में माहिर था.. .
.
टीचर ने जा कर सर्जरी करवाई और ऑपरेशन
कामयाब रहा..
.
.
जब वो बेहोशी से वापस आई और आँख खोली
तो टीचर ने एक सुदर और सुडौल नौजवान
डॉक्टर को अपने बेड के बगल खड़े हो कर
मुस्कुराते हुवे देखा.. .
.
वो
टीचर डॉक्टर को शुक्रिया बोलने ही वाली
थी अचानक उसका चेहरा नीला पड़ गया और
जब तक डॉक्टर कुछ समझें.. वो टीचर मर गयी.. .
.
डॉक्टर अचम्भे से देख रहे थे और समझने की
कोशिश
कर रहे थे की आखिर हुवा क्या है..
.
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.
तभी वो पीछे मुड़े और देखा कि lala , जो कि
उसी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी था
.
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उसने वेंटीलेटर का
प्लग हटा के अपना मोबाइल का चार्जर लगा
दिया था.. .
.
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.
अब अगर आप लोग ये सोच रहे थे कि lala डॉक्टर
बन गया था..
तो इसका
मतलब ये है की आप हिंदी/ तमिल/तेलुगु फिल्में
बहुत ज्यादा देखते हैं, या फिर बहुत ज्यादा
प्रेरणादायक कहानियां पढ़ते हैं। .
.
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Lala उल्लू था और उल्लू ही रहेगा-----------

एक पार्क मे दो बुजुर्ग बातें कर रहे थे- परिवार का महत्त्व

एक पार्क मे दो बुजुर्ग  बातें कर रहे थे- परिवार का महत्त्व

 

एक पार्क मे दो बुजुर्ग  बातें कर रहे थे....
पहला :- मेरी एक पोती है, शादी के लायक है... BE किया है, नौकरी करती है, कद - 5"2 इंच है.. सुंदर है
कोई लडका नजर मे हो तो बताइएगा..
दूसरा :- आपकी पोती को किस तरह का परिवार चाहिए...??
पहला :- कुछ खास नही.. बस लडका ME /M.TECH किया हो, अपना घर हो, कार हो, घर मे एसी हो, अपने बाग बगीचा हो, अच्छा job, अच्छी सैलरी, कोई लाख रू. तक हो...
दूसरा :- और कुछ...
पहला :- हाँ सबसे जरूरी बात.. अकेला होना चाहिए..

 मां-बाप,भाई-बहन नही होने चाहिए..
वो क्या है लडाई झगड़े होते है...
दूसरे बुजुर्ग की आँखें भर आई फिर आँसू पोछते हुए बोला - मेरे एक दोस्त का पोता है उसके भाई-बहन नही है, मां बाप एक दुर्घटना मे चल बसे, अच्छी नौकरी है, डेढ़ लाख सैलरी है, गाड़ी है बंगला है, नौकर-चाकर है..
पहला :- तो करवाओ ना रिश्ता पक्का..
दूसरा :- मगर उस लड़के की भी यही शर्त है की लडकी के भी मां-बाप,भाई-बहन या कोई रिश्तेदार ना हो...
कहते कहते उनका गला भर आया..
फिर बोले :- अगर आपका परिवार आत्महत्या कर ले तो बात बन सकती है.. आपकी पोती की शादी उससे हो जाएगी और वो बहुत सुखी रहेगी....
पहला :- ये क्या बकवास है, हमारा परिवार क्यों करे आत्महत्या.. कल को उसकी खुशियों मे, दुःख मे कौन उसके साथ व उसके पास होगा...
दूसरा :- वाह मेरे दोस्त, खुद का परिवार, परिवार है और दूसरे का कुछ नही... मेरे दोस्त अपने बच्चो को परिवार का महत्व समझाओ, घर के बडे ,घर के छोटे सभी अपनो के लिए जरूरी होते है... वरना इंसान खुशियों का और गम का महत्व ही भूल जाएगा, जिंदगी नीरस बन जाएगी...
पहले वाले बुजुर्ग बेहद शर्मिंदगी के कारण कुछ नही बोल पाए...
दोस्तों परिवार है तो जीवन मे हर खुशी, खुशी लगती है अगर परिवार नही तो किससे अपनी खुशियाँ और गम बांटोगे.

Friday, 3 November 2017

एक गरीब परिवार - गरीबो की मदद करे | A poor family - help poor people

एक गरीब परिवार - गरीबो की मदद करे

A poor family - help poor people 

 

एक गरीब FAMILY थी..!
जिस मे 5 लोग थे...।
माँ बाप और 3 बच्चे
बाप हमेशा बीमार रहता था ।
एक दिन वो मर गया ।
3 दिन तक
पड़ोसियों ने खाना भेजा ।
बाद में
भूखे रहने के दिन आ गए..।
माँ ने कुछ दिन तक जैसे तैसे
बच्चों को खाना खिलाया ।
लेकिन कब तक
आखिर फिर से भूखे रहना पड़ा ।
जिस की वजह से
8 साल का बेटा बीमार हो गया ।
और
बिस्तर पकड़ लिया....।
एक दिन 5 साल की बच्ची ने
माँ के कान में पूछा ।
•
•
माँ भाई कब मरेगा....??
माँ ने तड़प कर पूछा,
ऐसा क्यों पूछ रही हो.....??
बच्ची ने बड़ी मासूमियत से
जवाब दिया,
जिसे सुन कर
आप की आँखों में
आँसु आ जायेंगे...!
•
•
•
•
बच्ची का जवाब था ।
•
•
" माँ भाई मरेगा तो घर में
खाना आएगा ना...!"
भुख दुनिया में सबसे बड़ी है।
सुबह मिटाओ शाम को फिर खड़ी है।।
आपके खाने में गरीबो का भी
हक है ।
गरीबो की मदद करे
जो दुसरो के मोहताज़ है...।
अगर आप
हर massege,
Shaayri
SHARE करते हो...
थोडा टाइम निकाल कर
इस पोस्ट को भी
SHARE कर दीजिये..!
भगवान...
हम सब की मुसीबत टाल दे ।
और जो कोई भी
इस मेसेज को
आगे बढ़ा रहा है..।
Bhaghwan  उसकी
हर परेसानी को दूर कर दे..!!!

Wednesday, 1 November 2017

आम का पेड़ - माता पिता के प्रति हमारा कर्तव्य - कहानी | Mango tree - our duty to parents - story

आम का पेड़ - माता पिता के प्रति हमारा कर्तव्य - कहानी  

 
itkendra.net

*एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।*
*जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता।*
*पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।*
*उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।*
*बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया।*
*कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।*
*आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता।*
*एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,*
*"तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।"*
*बच्चे ने आम के पेड से कहा,*
*"अब मेरी खेलने की उम्र नही है*
*मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।"*
*पेड ने कहा,*
*"तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,*
*इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।"*
*उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।*
*उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।*
*आम का पेड उसकी राह देखता रहता।*
*एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,*
*"अब मुझे नौकरी मिल गई है,*
*मेरी शादी हो चुकी है,*
*मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।"*
*आम के पेड ने कहा,*
*"तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।"*
*उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।*
*आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।*
*कोई उसे देखता भी नहीं था।*
*पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।*
*फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा,*
*"शायद आपने मुझे नही पहचाना,*
*मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।"*
*आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा,*
*"पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।"*
*वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा,*
*"आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,*
*आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।"*
*इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।*
*वो आम का पेड़ कोई और नही हमारे माता-पिता हैं दोस्तों ।*
*जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।*
*जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।*
*पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी,*
*कोई समस्या खडी हुई।*
*आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।*
*जाकर उनसे लिपटे,*
*उनके गले लग जाये*
*फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।*
आप से प्रार्थना करता हूँ यदि ये कहानी अच्छी लगी हो तो कृपया ज्यादा से ज्यादा लोगों को भेजे ताकि किसी की औलाद सही रास्ते पर आकर अपने माता पिता को गले लगा सके !

Monday, 23 October 2017

गुनाहों का बोझ इंसानों से हल्का करने वाला नेक इंसान | Good Person

गुनाहों का बोझ इंसानों से हल्का करने वाला नेक इंसान | Good Person

 

एक बादशाह की आदत थी, कि वह भेस बदलकर लोगों की खैर-ख़बर लिया करता था,एक दिन अपने वज़ीर के साथ गुज़रते हुए शहर के किनारे पर पहुंचा तो देखा एक आदमी गिरा पड़ा हैl
बादशाह ने उसको हिलाकर देखा तो वह मर चुका था ! लोग उसके पास से गुज़र रहे थे, बादशाह ने लोगों को आवाज़ दी लेकिन कोई भी उसके नजदीक नहीं आया क्योंकि लोग बादशाह को पहचान ना सके ।
बादशाह ने वहां रह रहे लोगों से पूछा क्या बात है?  इस को किसी ने क्यों नहीं उठाया? लोगों ने कहा यह बहुत बुरा और गुनाहगार इंसान है ।।
बादशाह ने कहा क्या ये "इंसान" नहीं है?
और उस आदमी की लाश उठाकर उसके घर पहुंचा दी, और उसकी पत्नी को लोगों के रवैये के बारे में बताया ।।।
उसकी पत्नी अपने पति की लाश देखकर रोने लगी, और कहने लगी "मैं गवाही देती हूं मेरा पति बहुत नेक इंसान है"!!!!
इस बात पर बादशाह को बड़ा ताज्जुब हुआ कहने लगा "यह कैसे हो सकता है? लोग तो इसकी बुराई कर रहे थे और तो और इसकी लाश को हाथ तक लगाने को भी तैयार ना थे?"
उसकी बीवी ने कहा "मुझे भी लोगों से यही उम्मीद थी, दरअसल हकीकत यह है कि मेरा पति हर रोज शहर के शराबखाने में जाता शराब खरीदता और घर लाकर नालियों में डाल देता और कहता कि चलो कुछ तो गुनाहों का बोझ इंसानों से हल्का हुआ,
और रात में इसी तरह एक बुरी औरत यानी वेश्या के पास जाता और उसको एक रात की पूरी कीमत देता और कहता कि अपना दरवाजा बंद कर ले, कोई तेरे पास ना आए घर आकर कहता ख़ुदा का शुक्र है,आज उस औरत और नौजवानों के गुनाहों का मैंने कुछ बोझ हल्का कर दिया, लोग उसको उन जगहों पर जाता देखते थे,
मैं अपने पति से कहती "याद रखो जिस दिन तुम मर गए लोग तुम्हें नहलाने तक नहीं आएंगे,ना तुम्हारी अर्थी को कंधा देने आएंगे । वह हंसते और मुझसे कहते कि घबराओ नहीं तुम देखोगी कि मेरी अर्थी वक्त का बादशाह और नेक लोग उठाएंगे....
यह सुनकर बादशाह रो पड़ा और कहने लगा मैं बादशाह हूं, कल हम इसको नहलायेंगे, इसकी अर्थी को कंधा देंगे और इसका दाह संस्कार भी करवाएंगेl
आज हम बज़ाहिर कुछ देखकर या दूसरों से कुछ सुनकर अहम फैसले कर बैठते हैं अगर हम दूसरों के दिलों के भेद जान जाएं तो हमारी ज़बाने गूंगी हो जाएं,
किसी को गलत समझने से पहले देख लिया करें कि वह ऐसा है भी कि नहीं? और हमारे सही या ग़लत कहने से सही ग़लत नहीं हो जायेगा और  जो ग़लत है वो सही नहीं हो जायेगा ।
हम दूसरों के बारे में फैसला करने में महज़ अपना वक़्त ज़ाया कर रहे हैं..बेहतर ये है कि अपना कीमती वक़्त किसी की बुराई करने की बजाय अच्छी सोच के साथ परोपकार में लगाएं !!!