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Saturday, 14 July 2018

*"सीख"*

एक अत्यंत मार्मिक प्रेरणादायक कहानी।
जरूर से जरूर पढ़ें।
भोर के समय सूर्यदेवता ने अपना प्रसार क्षेत्र विस्तृत करना आरंभ कर दिया था. सत्य कुमार बालकनी में आंखें मूंदे बैठे थे, तभी किचन से उनकी धर्मपत्नी सुधा चाय लेकर आई ।
*“लो, ऐसे कैसे बैठे हो, अभी तो उठे हो, फिर आंख लग गई क्या? क्या बात है, तबियत ठीक नहीं लग रही है क्या?”* सुधा ने मेज़ पर चाय की ट्रे रखते हुए पूछा. सत्य कुमार ने धीमे से आंखें खोलकर उन्हें देखा और पुन: आंखें मूंद लीं.
सुधा कप में चाय उड़ेलते हुए दबे स्वर में बोलने लगी,
*“मुझे मालूम है, दीपू का वापस जाना आपको खल रहा है. मुझे भी अच्छा नहीं लग रहा है, लेकिन क्या करें. हर बार ऐसा ही होता है- बच्चे आते हैं, कुछ दिनों की रौनक होती है और वे चले जाते हैं.”*
मेरठ यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रवक्ता और लेखक सत्य कुमार की विद्वत्ता उनके चेहरे से साफ़ झलकती थी. उनकी पुस्तकों से आनेवाली रॉयल्टी रिटायरमेंट के बाद पनपनेवाले अर्थिक अभावों को दूर फेंकने में सक्षम थी. उनके दो बेटों में छोटा सुदीप अपनी सहपाठिनी के साथ प्रेम -विवाह कर मुम्बई में सेटल हो गया था. विवाह के बाद वो उनसे ज़्यादा मतलब नहीं रखता था. बड़ा बेटा दीपक कंप्यूटर इंजीनियर था. उसने अपने माता-पिता की पसंद से अरेन्ज्ड मैरिज की थी. उसकी पत्नी मधु सुंदर, सुशील और हर काम में निपुण, अपने सास-ससुर की लाडली बहू थी. दीपक और मधु कुछ वर्षों से लंदन में थे और दोनों वहीं सेटल होने की सोच रहे थे.
दीपक का लंदन रुक जाना सत्य कुमार को अच्छा नहीं लगा, मगर सुधा ने उन्हें समझा दिया था कि अपनी ममता को बच्चों की तऱक़्क़ी के आड़े नहीं लाना चाहिए और वैसे भी वो लंदन रहेगा तो भी क्या, आपके रिटायरमेंट के बाद हम ही उसके पास चले जाएंगे. दीपक और मधु उनके पास साल में एक बार 10-15 दिनों के लिए अवश्य आते और उनसे साथ लंदन चलने का अनुरोध करते. मधु जितने दिन वहां रहती, अपने सास-ससुर की ख़ूब सेवा करती.
आज सत्य कुमार को रिटायर हुए पूरे दो वर्ष हो चुके थे, मगर इन दो वर्षों में दीपक ने उन्हें लंदन आने के लिए भूले से भी नहीं कहा था. सुधा उनसे बार-बार ज़िद किया करती थी, *‘चलो हम ही लंदन चलें’,* लेकिन वो बड़े ही स्वाभिमानी व्यक्ति थे और बिना बुलावे के कहीं जाना स्वयं का अपमान समझते थे.
उनकी बंद आंखों के पीछे कल रात के उस दृश्य की बारम्बार पुनरावृत्ति हो रही थी, जो उन्होंने दुर्भाग्यवश अनजाने में देखा था… दीपक और मधु अपने कमरे में वापसी के लिए पैकिंग कर रहे थे, दोनों में कुछ बहस छिड़ी हुई थी,
*“देखो-तुम भूले से भी मम्मी-पापा को लंदन आने के लिए मत कहना, वो दोनों तो कब से तुम्हारी पहल की ताक में बैठे हैं, मुझसे उनके नखरे नहीं उठाए जाएंगे… मुझे ही पता है, मैं यहां कैसे 15-20 दिन निकालती हूं. सारा दिन नौकरानियों की तरह पिसते रहो, फिर भी इनके नखरे ढीले नहीं होते. चाहो तो हर महीने कुछ पैसे भेज दिया करो, हमें कहीं कोई कमी नहीं आएगी…”* मधु बार-बार गर्दन झटकते हुए बड़बड़ाए जा रही थी.
*“कैसी बातें कर रही हो? मुझे तुम्हारी उतनी ही चिन्ता है जितनी कि तुम्हें. तुम फ़िक्र मत करो, मैं उनसे कभी नहीं कहूंगा. मुझे पता है, पापा बिना कहे लंदन कभी नहीं आएंगे.”*
दीपक मधु के गालों को थपथपाता हुआ उसे समझा रहा था.
*“मुझे तो ख़ुद उनके साथ एडजस्ट करने में द़िक़्क़त होती है. वे अभी भी हमें बच्चा ही समझते हैं. अपने हिसाब से ही चलाना चाहते हैं. समझते ही नहीं कि उनकी लाइफ़ अलग है, हमारी लाइफ़ अलग… उनकी इसी आदत की वजह से सुदीप ने भी उनसे कन्नी काट ली…”* दीपक धाराप्रवाह बोलता चला जा रहा था. दोनों इस बात से बेख़बर थे कि दरवाज़े के पास खड़े सत्य बुत बने उनके इस वार्तालाप को सुन रहे थे.
सत्य कुमार सन्न थे… उनका मस्तिष्क कुछ सोचने-समझने के दायरे से बाहर जा चुका था, अत: वो उन दोनों के सामने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं कर पाए. उनको सी-ऑफ़ करने तक का समय उन्होंने कैसे कांटों पर चलकर गुज़ारा था, ये बस उनका दिल ही जानता था. दीपक और मधु जिनकी वो मिसाल दिया करते थे, उन्हें इतना बड़ा धोखा दे रहे थे… जाते हुए दोनों ने कितने प्यार और आदर के साथ उनके पैर छुए थे. ये प्यार… ये अपनापन… सब दिखावा… छि:… उनका मन पुन: घृणा और क्षोभ से भर उठा. वो यह भी तय नहीं कर पा रहे थे कि सुधा को इस बारे में बताएं अथवा नहीं, ये सोचकर कि क्या वो यह सब सह पाएगी… सत्य बार-बार बीती रात के घटनाक्रम को याद कर दुख के महासागर में गोते लगाने लगे.
समय अपनी ऱफ़्तार से गुज़रता जा रहा था, मगर सत्य कुमार का जीवन जैसे उसी मोड़ पर थम गया था. अपनी आन्तरिक वेदना को प्रत्यक्ष रूप से बाहर प्रकट नहीं कर पाने के कारण वो भीतर-ही-भीतर घुटते जा रहे थे. उस घटना के बाद उनके स्वभाव में भी काफ़ी नकारात्मक परिवर्तन आ गया. दुख को भीतर-ही-भीतर घोट लेने के कारण वे चिड़चिड़े होते जा रहे थे. बच्चों से मिली उपेक्षा से स्वयं को अवांछित महसूस करने लगे थे. धीरे-धीरे सुधा भी उनके दर्द को महसूस करने लगी. दोनों मन-ही-मन घुटते, मगर एक-दूसरे से कुछ नहीं कहते. लेकिन अभी भी उनके दिल के किसी कोने में उम्मीद की एक धुंधली किरण बाकी थी कि शायद कभी किसी दिन बच्चों को उनकी ज़रूरत महसूस हो और वो उन्हें जबरन अपने साथ ले जाएं, ये उम्मीद ही उनके अंत:करण की वेदना को और बढ़ा रही थी.
एक दिन सत्य कुमार किसी काम से हरिद्वार जा रहे थे. उन्हें चले हुए 3-4 घंटे हो चुके थे, तभी कार से अचानक खर्र-खर्र की आवाज़ें आने लगीं. इससे पहले कि वो कुछ समझ पाते, कार थोड़ी दूर जाकर रुक गई और दोबारा स्टार्ट नहीं हुई. सिर पर सूरज चढ़कर मुंह चिढ़ा रहा था. पसीने से लथपथ सत्य लाचार खड़े अपनी कार पर झुंझला रहे थे.
*“थोड़ा पानी पी लीजिए.”* सुधा पानी देते हुए बोली *“काश, कहीं छाया मिल जाए.”* सुधा साड़ी के पल्लू से मुंह पोंछती हुई इधर-उधर नज़रें दौड़ाने लगी.
*“मेरा तो दिमाग़ ही काम नहीं कर रहा है… ये सब हमारे साथ ही क्यों होता है…? क्या भगवान हमें बिना परेशान किए हमारा कोई काम पूरा नहीं कर सकता?”* ख़ुद को असहाय पाकर सत्य कुमार ने भगवान को ही कोसना शुरू कर दिया.
*“देखो, वहां दूर एक पेड़ है, वहां दो-तीन छप्पर भी लगे हैं, वहीं चलते हैं. शायद कुछ मदद मिल जाए…”* सुधा ने दूर एक बड़े बरगद के पेड़ की ओर इशारा करते हुए कहा. दोनों बोझिल क़दमों से उस दिशा में बढ़ने लगे.
वहां एक छप्पर तले चाय की छोटी-सी दुकान थी, जिसमें दो-तीन टूटी-फूटी बेंचें पड़ी थीं. उन पर दो ग्रामीण बैठे चाय पी रहे थे. वहीं पास में एक बुढ़िया कुछ गुनगुनाती हुई उबले आलू छील रही थी. दुकान में एक तरफ़ एक टूटे-फूटे तसले में पानी भरा था, उसके पास ही अनाज के दाने बिखरे पड़े थे. कुछ चिड़िया फुदककर तसले में भरा पानी पी रही थीं और कुछ बैठी पेटपूजा कर रही थीं. साथ लगे पेड़ से बार-बार गिलहरियां आतीं, दाना उठातीं और सर्र से वापस पेड़ पर चढ़ जातीं. पेड़ की शाखाओं के हिलने से ठंडी हवा का झोंका आता जो भरी दोपहरी में बड़ी राहत दे रहा था. शाखाओं के हिलने से, पक्षियों की चहचहाहट से, गिलहरियों की भाग-दौड़ से उपजे मिश्रित संगीत की गूंज अत्यंत कर्णप्रिय लग रही थी. सुधा आंखें मूंदे इस संगीत का आनंद लेने लगी.
*“क्या चाहिए बाबूजी, चाय पीवो?”*
बुढ़िया की आवाज़ से सुधा की तंद्रा टूटी. वो सत्य कुमार की ओर देखते हुए बोली,
*“आप चाय के साथ कुछ लोगे क्या?”*
*“नहीं.”* सत्य कुमार ने क्रोध भरा टका-सा जवाब दिया.
*"बाबूजी, आपकी सकल बतावे है कि आप भूखे भी हो और परेसान भी, खाली पेट तो रत्तीभर परेसानी भी पहाड़ जैसी दिखे है. पेट में कुछ डाल लो. सरीर भी चलेगा और दिमाग़ भी, हा-हा-हा…”* बुढ़िया इतना कह कर खुलकर हंस पड़ी.
बुढ़िया की हंसी देखकर सत्य कुमार तमतमा गए. लो पड़ गई आग में आहुति, सुधा मन में सोचकर सहम गई. वो मुंह से कुछ नहीं बोले, लेकिन बुढ़िया की तरफ़ घूरकर देखने लगे.
बुढ़िया चाय बनाते-बनाते बतियाने लगी,
*“बीबीजी, इस सुनसान जगह में कैसे थमे, क्या हुआ?”*
*"दरअसल हम यहां से गुज़र रहे थे कि हमारी गाड़ी ख़राब हो गयी. पता नहीं यहां आसपास कोई मैकेनिक भी मिलेगा या नहीं.”* सुधा ने लाचारी प्रकट करते हुए पूछा.
*“मैं किसी के हाथों मैकेनिक बुलवा लूंगी. आप परेसान ना होवो.”* बुढ़िया उन्हें चाय और भजिया पकड़ाते हुए बोली.
*“अरे ओ रामसरन, इधर आइयो…”* बुढ़िया दूर खेत में काम कर रहे व्यक्ति की ओर चिल्लाई. *“भाई, इन भले मानस की गाड़ी ख़राब हो गयी है, ज़रा टीटू मैकेनिक को तो बुला ला… गाड़ी बना देवेगा…इस विराने में कहां जावेंगे बिचारे.”* बुढ़िया के स्वर में ऐसा विनयपूर्ण निवेदन था जैसे उसका अपना काम ही फंसा हो.
*_बाबूजी चिन्ता मत करो, टीटू ऐसा बच्चा है, जो मरी कैसी भी बिगड़ी गाड़ी को चलता कर देवे है.”* इतना कह बुढ़िया चिड़ियों के पास बैठ ज्वार-बाजरे के दाने बिखेरने लगी. *“अरे मिठ्ठू, आज मिठ्ठी कहां है?”* वो एक चिड़िया से बतियाने लगी.
सत्य को उसका यह व्यवहार कुछ सोचने पर मजबूर कर रहा था. ऐसी बुढ़िया जिसकी शारीरिक और भौतिक अवस्था अत्यंत जर्जर है, उसका व्यवहार, उसकी बोलचाल इतनी सहज, इतनी उन्मुक्त है जैसे कभी कोई दुख का बादल उसके ऊपर से ना गुज़रा हो, कितनी शांति है उसके चेहरे पर.
*“माई, तुम्हारा घर कहां है? यहां तो आसपास कोई बस्ती नज़र नहीं आती, क्या कहीं दूर रहती हो?”* सत्य कुमार ने विनम्रतापूर्वक प्रश्‍न किया.
*“बाबूजी, मेरा क्या ठौर-ठिकाना, कोई गृहसती तो है ना मेरी, जो कहीं घर बनाऊं? सो यहीं इस छप्पर तले मौज़ से रहू हूं. भगवान की बड़ी किरपा है.”* सत्य कुमार का ध्यान बुढ़िया के मुंह से निकले *'मौज़’* शब्द पर अटका. भला कहीं इस शमशान जैसे वीराने में अकेले रहकर भी मौज़ की जा सकती है. वो बुढ़िया द्वारा कहे गए कथन का विश्‍लेषण करने लगे, उन्हें इस बुढ़िया का फक्कड़, मस्ताना व्यक्तित्व अत्यंत रोचक लग रहा था.
*“यहां निर्जन स्थान पर अकेले कैसे रह लेती हो माई, कोई परेशानी नहीं होती क्या?”* सत्य कुमार ने उत्सुकता से पूछा.
*“परेसानी…”* बुढ़िया क्षण भर के लिए ठहरी, *“परेसानी काहे की बाबूजी, मजे से रहूं हूं, खाऊं हूं, पियूं हूं और तान के सोऊं हूं… देखो बाबूजी, मानस जन ऐसा प्रानी है, जो जब तक जिए है परेसानी-परेसानी चिल्लाता फिरे है, भगवान उसे कितना ही दे देवे, उसका पेट नहीं भरे है. मैं पुछू हूं, आख़िर खुस रहने को चाहवे ही क्या, ज़रा इन चिड़ियों को देखो, इन बिचारियों के पास क्या है. पर ये कैसे खुस होकर गीत गावे हैं.”*
सत्य कुमार को बुढ़िया की सब बातें ऊपरी कहावतें लग रही थीं.
*“पर माई, अकेलापन तो लगता होगा ना?”* सत्य कुमार की आंखों में दर्द झलक उठा.
*“अकेलापन काहे का बाबूजी, दिन में तो आप जैसे भले मानस आवे हैं. चाय पीने वास्ते, गांववाले भी आते-जाते रहवे हैं और ये मेरी चिड़कल बिटिया तो सारा दिन यहीं डेरा डाले रखे है.”* बुढ़िया पास फुदक रही चिड़ियों पर स्नेहमयी दृष्टि डालते हुए बोली.
क्या इतना काफ़ी है अकेलेपन के एहसास पर विजय प्राप्त करने के लिए, सत्य कुमार के मन में विचारों का मंथन चल रहा था. उनके पास तो सब कुछ है- घर-बार, दोस्तों का अच्छा दायरा, उनके सुख-दुख की साथी सुधा, फिर क्यों उन्हें मात्र बच्चों की उपेक्षा से अकेलेपन का एहसास सांप की तरह डसता है?
*"अकेलापन, परेसानी, ये सब फालतू की बातें हैं बाबूजी. जिस मानस को रोने की आदत पड़ जावे है ना, वो कोई-ना-कोई बहाना ढूंढ़ ही लेवे है रोने का.”* बुढ़िया की बातें सुन सत्य कुमार अवाक् रह गए. उन्हें लगा जैसे बुढ़िया ने सीधे-सीधे उन्हीं पर पत्थर दे मारा हो.
क्या सचमुच हर व़क़्त रोना, क़िस्मत को और दूसरों को दोष देना उनकी आदत बन गई है? क्यों उनका मन इतना व्याकुल रहता है…? सत्य कुमार के मन में उद्वेगों का एक और भंवर चल पड़ा.
*“माई, तुम्हारा घर-बार कहां है, कोई तो होगा तुम्हारा सगा-संबंधी?”* सत्य कुमार ने अपनी पूछताछ का क्रम ज़ारी रखा.
बुढ़िया गर्व से गर्दन अकड़ाते हुए बोली,
*“है क्यों नहीं बाबूजी, पूरा हरा-भरा कुनबा है मेरा. भगवान सबको बरकत दे. बाबूजी, मेरे आदमी को तो मरे ज़माना बीत गया. तीन बेटे और दो बेटियां हैं मेरी. नाती-पोतोंवाली हूं, सब सहर में बसे हैं और अपनी-अपनी गृहस्ती में मौज करे हैं.”* बुढ़िया कुछ देर के लिए रुककर फिर बोली,
*“मेरा एक बच्चा फौज में था, पिछले साल कसमीर में देस के नाम सहीद हो गया. भगवान उसकी आतमा को सान्ति देवे.”*
बुढ़िया की बात सुन दोनों हतप्रभ रह गए और एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे. इतनी बड़ी बात कितनी सहजता से कह गई थी वो और उसके चाय बनाने के क्रम में तनिक भी व्यवधान नहीं पड़ा था. वो पूरी तरह से सामान्य थी. ना चेहरे पर शिकन…. ना आंखों में नमी…
क्या इसे बच्चों का मोह नहीं होता? सत्य कुमार मन-ही-मन सोचने लगे,
*“तुम अपने बेटों के पास क्यों नहीं रहती हो?”* उन्होंने एक बड़े प्रश्‍नचिह्न के साथ बुढ़िया से पूछा.
*"नहीं बाबूजी… अब कौन उस मोह-माया के जंजाल में उलझे… सब अपने-अपने ढंग से अपनी गृहस्ती चलावे हैं. अपनी-अपनी सीमाओं में बंधे हैं. मैं साथ रहन लगूंगी, तो अब बुढ़ापे में मुझसे तो ना बदला जावेगा, सो उन्हें ही अपने हिसाब से चलाने की कोसिस करूंगी. ख़ुद भी परेसान रहूंगी और उन्हें भी परेसान करूंगी. मैं तो यहीं अपनी चिड़कल बिटियों के साथ भली….”* बुढ़िया दोनों हाथ ऊपर उठाते हुए बोली. *“अरे मेरी बिट्टू आ गई, आज तेरे बच्चे संग नहीं आए? कहीं तेरा साथ छोड़ फुर्र तो नहीं हो गये?”* बुढ़िया एक चिड़िया की ओर लपकी.
*“बाबूजी, देखो तो मेरी बिट्टू को… इसके बच्चे इससे उड़ना सीख फुर्र हो गए, तो क्या ये परेसान हो रही है? रोज़ की तरह अपना दाना-पानी लेने आयी है और चहके भी है. ये तो प्रकृति का नियम है बाबूजी, ऐसा ही होवे है. इस बारे में सोच के क्या परेसान होना.”*
बुढ़िया ने सीधे सत्य और सुधा की दुखती रग पर हाथ रख दिया. यही तो था उनके महादुख का मूल, उनके बच्चे उड़ना सीख फुर्र हो गए थे.
*“बाबूजी, संसार में हर जन अकेला आवे है और यहां से अकेला ही जावे है. भगवान हमारे जरिये से दुनिया में अपना अंस (अंश) भेजे हैं, मगर हम हैं कि उसे अपनी जायदाद समझ दाब लेने की कोसिस करे हैं. सो सारी ऊमर उसके पीछे रोते-रोते काट देवे हैं. जो जहां है, जैसे जीवे है जीने दो और ख़ुद भी मस्ती से जीवो. ज़ोर-ज़बरदस्ती का बन्धन तो बाबूजी कैसा भी हो, दुखे ही है. प्यार से कोई साथ रहे तो ठीक, नहीं तो तू अपने रस्ते मैं अपने रस्ते…”* बुढ़िया एक दार्शनिक की तरह बेफ़िक्री-से बोले चली जा रही थी और वो दोनों मूक दर्शक बने सब कुछ चुपचाप सुन रहे थे. उसकी बातें सत्य कुमार के अंतर्मन पर गहरी चोट कर रही थी.
ये अनपढ़ मरियल-सी बुढ़िया ऐसी बड़ी-बड़ी बातें कर रही है. इस ढांचा शरीर में इतना प्रबल मस्तिष्क. क्या सचमुच इस बुढ़िया को कोई मानसिक कष्ट नहीं है…? बुढ़िया के कड़वे, लेकिन सच्चे वचन सत्य कुमार के मन पर भीतर तक असर डाल रहे थे.
*“लो रामसरन आ गया.”* बुढ़िया की उत्साहपूर्ण आवाज़ से दोनों की ध्यानमग्नता टूटी.
आज सत्य कुमार को बुढ़िया के व्यक्तित्व के सामने स्वयं का व्यक्तित्व बौना प्रतीत हो रहा था. आज महाज्ञानी सत्य कुमार को एक अनपढ़, अदना-सी बुढ़िया से तत्व ज्ञान मिला था. आज बुढ़िया का व्यवहार ही उन्हें काफ़ी सीख दे गया था. सत्य कुमार महसूस कर रहे थे जैसे उनके चारों ओर लिपटे अनगिनत जाले एक-एक करके हटते जा रहे हों. अब वो अपने अंतर्मन की रोशनी में सब कुछ स्पष्ट देख पा रहे थे. जो पास नहीं हैं, उसके पीछे रोते-कलपते और जो है उसका आनंद न लेने की भूल उन्हें समझ आ गई थी.
*“बाबूजी, कार ठीक हो गई है.”* मैकेनिक की आवाज़ से सत्य कुमार विचारों के आकाश से पुन: धरती पर आए.
*“आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.”* सत्य कुमार ने मुस्कुराहट के साथ मैकेनिक
का अभिवादन किया. उनके चेहरे से दुख और परेशानी के भाव गायब हो चुके थे. दोनों कार में बैठ गए. सत्य ने वहीं से बुढ़िया पर आभार भरी दृष्टि डाली और कार वापस घुमा ली.
*“अरे, यह क्या, हरिद्वार नहीं जाना क्या?”* सुधा ने घबराकर पूछा.
*“नहीं.”* सत्य कुमार ने बड़े ज़ोश के साथ उत्तर दिया. *“हम हरिद्वार नहीं जा रहे हैं.”* थोड़ा रुककर पुन: बोले, *“हम मसूरी जा रहे हैं घूमने-फिरने. काम तो चलते ही रहते हैं. कुछ समय अपने लिए भी निकाला जाए.”*
सत्य कुमार कुछ गुनगुनाते हुए ड्राइव कर रहे थे और सुधा उन्हें विस्मित् नेत्रों से घूरे जा रही थी.

Saturday, 7 July 2018

* ग्रन्थकार की मुखारविंदसे *

*वो कुँए का मैला कुचैला पानी*
*पिके भी 100 वर्ष जी लेते थे*
*हम RO का शुद्ध पानी पीकर*
*40 वर्ष में बुढे़ हो रहे है।*
*वो घाणी का मैला सा तेल खाके बुढ़ापे में भी दौड़~मेहनत कर लेते थे।*

*हम डबल~ट्रिपल फ़िल्टर तेल*
*खाकर जवानी में भी हाँफ जाते है।*

*वो डले वाला नमक खाके*
*बीमार ना पड़ते थे।*
*हम आयोडीन युक्त खाके*
*हाई~लो बीपी लिये पड़े है।*
*वो नीम-बबूल,कोयला नमक*
*से दाँत चमकाते थे और 80 वर्ष*
*तक भी चबा चबा कर खाते* थे।*
*और हम कॉलगेट सुरक्षा वाले रोज डेंटिस्ट के चक्कर लगाते है ।।*
*वो नाड़ी पकड़ कर*
*रोग बता देते थे और*
*आज जाँच कराने पर भी*
*रोग नहीं जान पाते है।*
*वो 7~8 बच्चे जन्मने वाली माँ 80 वर्ष की अवस्था में भी* *घर~खेत का काम करती थी।*
*आज 1महीने से डॉक्टर की देख~रेख में रहते है फिर भी बच्चे पेट फाड़ कर जन्मते है।।*
*पहले काले गुड़ की मिठाइयां*
*ठोक ठोक के खा जाते थे।*
*आजकल तो खाने से पहले ही*
*शुगर की बीमारी हो जाती है।*
*पहले बुजर्गो के भी*
*घुटने कन्धे नहीं दुखते थे।*
*जवान भी घुटनो और कन्धों*
*के दर्द से कहराता है ।*
*और भी बहुत सी समस्याये है फिर भी लोग इसे विज्ञान का युग कहते है, ☝☝☝समझ नहीं आता ये विज्ञान का युग है या अज्ञान का ?????*

*कुछ अावश्यक जानकारी जो आपके ब्यक्तिगत एवं सामाजिक जीवन में अहम है*

Important Helpline no.

*100* - पुलिस
*101*-  आग (फायर सर्विस)
*102*- एम्ब्युलेन्स
*103*- यातायात पुलिस
*1031*- भ्रष्टाचार विरोधी            (निरोधक)
*1072*- ट्रेन दुर्घटना ( रोकने और सूचना के लिए )
*1073*- सड़क दुर्घटना की सूचना
*108*- आपदा प्रबंधन
*1090*- आतंक विरोधी हेल्पलाइन / अलर्ट अखिल भारतीय
*1092*- पृथ्वी-भूकंप सहायता लाइन सेवा
*1098*- बाल शोषण हॉटलाइन
*1322*- भारतीय रेलवे सुरक्षा हेल्पलाइन
*139*- रेलवे पूछताछ
*155*- किसान कॉल सेंटर
*155300*- नागरिक कॉल सेंटर
*1091*-महिला सहायता लाइन
*1076*- सीएम सहायता लाइन
*1098*-बाल सहायता लाइन
*1090*- क्राइम स्टॉपर
*इसे अपनों के बीच शेयर जरूर करें !*

Wednesday, 4 July 2018

आओ देखे समस्या कहां है

*आओ देखे समस्या कहां है।*
*कुछ समझने की कोशिश करें बलात्कार अचानक इस देश मे क्यो बढ़ गए ???*
कुछ उद्धरण से समझते हैं
1) लोग कहते हैं कि रेप क्यों होता है ?
एक 8 साल का लडका सिनेमाघर मे राजा हरिशचन्द्र फिल्म देखने गया और फिल्म से प्रेरित होकर उसने सत्य का मार्ग चुना और वो बडा होकर महान व्यक्तित्व से जाना गया।
परन्तु आज 8 साल का लडका टीवी पर क्या देखता है ?
सिर्फ नंगापन और अश्लील वीडियो और फोटो,
मैग्जीन में अर्धनग्न फोटो,
पडोस मे रहने वाली भाभी के छोटे कपडे !!
लोग कहते हैं कि रेप का कारण बच्चों की मानसिकता है।
पर वो मानसिकता आई कहा से ?
उसके जिम्मेदार कहीं न कहीं हम खुद जिम्मेदार है।
क्योंकि हम *joint family नही रहते।*
हम अकेले रहना पसंद करते हैं। और अपना परिवार चलाने के लिये माता पिता को बच्चों को अकेला छोड़कर काम पर जाना है और बच्चे अपना अकेलापन दूर करने के लिये टीवी और इन्टरनेट का सहारा लेते हैं।
और उनको देखने के लिए क्या मिलता है सिर्फ वही अश्लील वीडियो और फोटो तो वो क्या सीखेंगे यही सब कुछ ना ?
अगर वही बच्चा अकेला न रहकर अपने दादा दादी के साथ रहे तो कुछ अच्छे संस्कार सीखेगा।
कुछ हद तक ये भी जिम्मेदार है।
2) पूरा देश रेप पर उबल रहा है,
छोटी छोटी बच्चियो से जो दरिंदगी हो रही उस पर सबके मन मे गुस्सा है।
कोई सरकार को कोस रहा,
कोई समाज को तो कई feminist सारे लड़को को बलात्कारी घोषित कर चुकी है !
लेकिन आप सुबह से रात तक
कई बार sunny leon के कंडोम के add देखते है ..!!
फिर दूसरे add में  रणवीर सिंह शैम्पू के ऐड में लड़की पटाने के तरीके बताता है...!!
ऐसे ही Close up,
लिम्का,
Thumsup भी दिखाता है। *लेकिन तब आपको गुस्सा नही आता है है ना ???*
आप अपने छोटे बच्चों के साथ music चैनल पर सुनते ही हैं
*दारू बदनाम कर दी,*
*कुंडी मत खड़काओ राजा,*
*मुन्नी बदनाम,*
*चिकनी चमेली,*
*झण्डू बाम,*
*तेरे साथ करूँगा गन्दी बात,*
और न जाने ऐसी कितनी मूवीज गाने देखते सुनते है।
*तब आपको गुस्सा नही आता ??*
मम्मी बच्चों के साथ Star Plus, जी TV, सोनी TV देखती है जिसमें एक्टर और एक्ट्रेस सुहाग रात मनाते है।
किस करते है।
आँखो में आँखे डालते है।
और तो और भाभीजी घर पर है, जीजाजी छत पर है,
टप्पू के पापा और बबिता जिसमे एक व्यक्ति दूसरे की पत्नी के पीछे घूमता लार टपकता नज़र आएगा
पूरे परिवार के साथ देखते है।
*इन सब serial को देखकर आपको गुस्सा नही आता ??*
फिल्म्स आती है जिसमे किस (चुम्बन, आलिंगन), रोमांस से लेकर गंदी कॉमेडी आदि सब कुछ दिखाया जाता है।
*पर आप बड़े मजे लेकर देखते है, इन सब को देखकर आपको गुस्सा नही आता ??*
खुलेआम TV- फिल्म वाले आपके बच्चों को बलात्कारी बनाते है।
उनके मन मे जहर घोलते है।
तब आपको गुस्सा नही आता ?
क्योकि आपको लगता है कि
रेप रोकना सरकार की जिम्मेदारी है ।
पुलिस,
प्रशासन,
न्यायव्यवस्था की जिम्मेदारी है..
लेकिन क्या समाज और मीडिया की कोई जिम्मेदारी नही।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कुछ भी परोस दोगे क्या ?
आप तो अखबार पढ़कर।
News देखकर बस गुस्सा निकालेंगे।
कोसेंगे सिस्टम को,
सरकार को,
पुलिस को,
प्रशासन को,
DP बदल लेंगे,
सोशल मीडिया पे खूब हल्ला मचाएंगे,
बहुत ज्यादा हुआ तो कैंडल मार्च या धरना कर लेंगे लेकिन....
TV चैनल्स, वालीवुड, मीडिया को कुछ नही कहेंगे। क्योकि वो आपके मनोरंजन के लिए है।
सच पुछिऐ तो TV Channels अश्लीलता परोस रहे है ...
पाखंड परोस रहे है,
झूंठे विषज्ञापन परोस रहे है ,
झूंठेऔर सत्य से परे ज्योतिषी पाखंड से भरी कहानियां एवं मंत्र, ताबीज आदि परोस रहै है।
उनकी भी गलती नही है।
क्योंकि आप खरीददार हो .....??
बाबा बंगाली, तांत्रिक बाबा, स्त्री वशीकरण के जाल में खुद फंसते हो ।
3) अभी टीवी का खबरिया चैनल मंदसौर के गैंगरेप की घटना पर समाचार चला रहा है।
जैसे ही ब्रेक आये:-
*पहला विज्ञापन बोडी स्प्रे का जिसमे लड़की आसमान से गिरती है,*
*दूसरा कंडोम का,*
*तीसरा नेहा स्वाहा-स्नेहा स्वाहा वाला,*
*और चौथा प्रेगनेंसी चेक करने वाले मशीन का......*
जब हर विज्ञापन, हर फिल्म में नारी को केवल भोग की वस्तु समझा जाएगा तो बलात्कार के ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलना निश्चित है।
क्योंकि
"हादसा एक दम नहीं होता,
वक़्त करता है परवरिश बरसों....!"
ऐसी निंदनीय घटनाओं के पीछे निश्चित तौर पर भी बाजारवाद ही ज़िम्मेदार है ..
4) आज सोशल मीडिया, इंटरनेट और फिल्मों में @ पोर्न परोसा जा रहा है। तो बच्चे तो बलात्कारी ही बनेंगे ना।

*ध्यान रहे समाज और मीडिया को बदले बिना ये आपके कठोर सख्त कानून कितने ही बना लीजिए, ये घटनाएं नही रुकने वाली है।*
इंतज़ार कीजिये बहुत जल्द आपको फिर केंडल मार्च निकालने का अवसर हमारा स्वछंद समाज, बाजारू मीडिया और गंदगी से भरा सोशल मिडीया देने वाला है ।
*अगर अब भी आप बदलने की शुरुआत नही करते हैं तो समझिए कि ......*
*फिर कोई भारत की बेटी निर्भया एवम् अन्य बेटियों की तरह बर्बाद होने वाली है।*
*आपको आपकी बेटियां बचना है तो सरकार कानून पुलिस के भरोसे से बाहर निकलकर समाज मीडिया और सोशल मीडिया की गंदगी साफ करने की आवश्यकता है।*
अगर किसी को यह बात
 अच्छी लगी हो तो प्लीज शेयर अवश्य करे ।

Monday, 13 November 2017

सत्य क्या है और उचित क्या है? अपनी आत्मा की आवाज़

सत्य क्या है और उचित क्या है? अपनी आत्मा की आवाज़ 

 

महाभारत में कर्ण ने श्री कृष्ण से पूछा "मेरी माँ ने मुझे जन्मते ही त्याग दिया, क्या ये मेरा अपराध था कि मेरा जन्म एक अवैध बच्चे के रूप में हुआ?
दोर्णाचार्य ने मुझे शिक्षा देने से मना कर दिया क्योंकि वो मुझे क्षत्रीय नही मानते थे, क्या ये मेरा कसूर था?
परशुराम जी ने मुझे शिक्षा दी साथ ये शाप भी दिया कि मैं अपनी विद्या भूल जाऊंगा क्योंकि वो मुझे क्षत्रीय समझते थे।
भूलवश एक गौ मेरे तीर के रास्ते मे आकर मर गयी और मुझे गौ वध का शाप मिला?
द्रौपदी के स्वयंवर में मुझे अपमानित किया गया, क्योंकि मुझे किसी राजघराने का कुलीन व्यक्ति नही समझा गया।
यहां तक कि मेरी माता कुंती ने भी मुझे अपना पुत्र होने का सच अपने दूसरे पुत्रों की रक्षा के लिए स्वीकारा।
मुझे जो कुछ मिला दुर्योधन की दया स्वरूप मिला!
तो क्या ये गलत है कि मैं दुर्योधन के प्रति अपनी वफादारी रखता हूँ..??
श्री कृष्ण मंद मंद मुस्कुराते हुए बोले-
"कर्ण, मेरा जन्म जेल में हुआ था। मेरे पैदा होने से पहले मेरी मृत्यु मेरा इंतज़ार कर रही थी। जिस रात मेरा जन्म हुआ उसी रात मुझे मेरे माता-पिता से अलग होना पड़ा। तुम्हारा बचपन रथों की धमक, घोड़ों की हिनहिनाहट और तीर कमानों के साये में गुज़रा।
मैने गायों को चराया और गोबर को उठाया।
जब मैं चल भी नही पाता था तो मेरे ऊपर प्राणघातक हमले हुए।
कोई सेना नही, कोई शिक्षा नही, कोई गुरुकुल नही, कोई महल नही, मेरे मामा ने मुझे अपना सबसे बड़ा शत्रु समझा।
जब तुम सब अपनी वीरता के लिए अपने गुरु व समाज से प्रशंसा पाते थे उस समय मेरे पास शिक्षा भी नही थी। बड़े होने पर मुझे ऋषि सांदीपनि के आश्रम में जाने का अवसर मिला।
तुम्हे अपनी पसंद की लड़की से विवाह का अवसर मिला मुझे तो वो भी नही मिली जो मेरी आत्मा में बसती थी।
मुझे बहुत से विवाह राजनैतिक कारणों से या उन स्त्रियों से करने पड़े जिन्हें मैंने राक्षसों से छुड़ाया था!
जरासंध के प्रकोप के कारण मुझे अपने परिवार को यमुना से ले जाकर सुदूर प्रान्त मे समुद्र के किनारे बसाना पड़ा। दुनिया ने मुझे कायर कहा।
यदि दुर्योधन युद्ध जीत जाता तो विजय का श्रेय तुम्हे भी मिलता, लेकिन धर्मराज के युद्ध जीतने का श्रेय अर्जुन को मिला! मुझे कौरवों ने अपनी हार का उत्तरदायी समझ।
हे कर्ण! किसी का भी जीवन चुनोतियों से रहित नही है। सबके जीवन मे सब कुछ ठीक नही होता। कुछ कमियां अगर दुर्योधन में थी तो कुछ युधिष्टर में भी थीं।
सत्य क्या है और उचित क्या है? ये हम अपनी आत्मा की आवाज़ से स्वयं निर्धारित करते हैं!
इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हमारे साथ अन्याय होता है,
इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हमारा अपमान होता है,
इस बात से कोई फर्क नही पड़ता कितनी बार हमारे अधिकारों का हनन होता है।
फ़र्क़ सिर्फ इस बात से पड़ता है कि हम उन सबका सामना किस प्रकार करते हैं..!!
            जय श्री कृष्णा

Sunday, 12 November 2017

बिना अक्ल के भी होती है, नर पर नारी भारी।

बिना अक्ल के भी होती है, नर पर नारी भारी। 


*हास्य कविता*


😀😀😀😀😀😀😀


अक्ल बाटने लगे विधाता,

             लंबी लगी कतारी ।

सभी आदमी खड़े हुए थे,

            कहीं नहीं थी नारी ।


सभी नारियाँ कहाँ रह गई,

          था ये अचरज भारी ।

पता चला ब्यूटी पार्लर में,

          पहुँच गई थी सारी।


मेकअप की थी गहन प्रक्रिया,

           एक एक पर भारी ।

बैठी थीं कुछ इंतजार में,

          कब आएगी बारी ।


उधर विधाता ने पुरूषों में,

         अक्ल बाँट दी सारी ।

ब्यूटी पार्लर से फुर्सत पाकर,

        जब पहुँची सब नारी ।


बोर्ड लगा था स्टॉक ख़त्म है,

        नहीं अक्ल अब बाकी ।

रोने लगी सभी महिलाएं ,

        नींद खुली ब्रह्मा की ।


पूछा कैसा शोर हो रहा है,

         ब्रह्मलोक के द्वारे ?

पता चला कि स्टॉक अक्ल का

         पुरुष ले गए सारे ।


ब्रह्मा जी ने कहा देवियों ,

          बहुत देर कर दी है ।

जितनी भी थी अक्ल वो मैंने,

          पुरुषों में भर दी है ।


लगी चीखने महिलाये ,

         ये कैसा न्याय तुम्हारा?

कुछ भी करो हमें तो चाहिए,

          आधा भाग हमारा ।


पुरुषो में शारीरिक बल है,

          हम ठहरी अबलाएं ।

अक्ल हमारे लिए जरुरी ,

         निज रक्षा कर पाएं ।


सोचकर दाढ़ी सहलाकर ,

         तब बोले ब्रह्मा जी ।

एक वरदान तुम्हे देता हूँ ,

         अब हो जाओ राजी ।


थोड़ी सी भी हँसी तुम्हारी ,

         रहे पुरुष पर भारी ।

कितना भी वह अक्लमंद हो,

         अक्ल जायेगी मारी ।


एक औरत ने तर्क दिया,

        मुश्किल बहुत होती है।

हंसने से ज्यादा महिलाये,

        जीवन भर रोती है ।


ब्रह्मा बोले यही कार्य तब,

        रोना भी कर देगा ।

औरत का रोना भी नर की,

        अक्ल हर लेगा ।


एक अधेड़ बोली बाबा,

       हंसना रोना नहीं आता ।

झगड़े में है सिद्धहस्त हम,

       खूब झगड़ना भाता ।


ब्रह्मा बोले चलो मान ली,

       यह भी बात तुम्हारी ।

झगड़े के आगे भी नर की,

       अक्ल जायेगी मारी ।


ब्रह्मा बोले सुनो ध्यान से,

       अंतिम वचन हमारा ।

तीन शस्त्र अब तुम्हे दिए,

       पूरा न्याय हमारा ।


इन अचूक शस्त्रों में भी,

       जो मानव नहीं फंसेगा ।निश्चित समझो,

       उसका घर नहीं बसेगा ।


कहे कवि मित्र ध्यान से,

       सुन लो बात हमारी ।

बिना अक्ल के भी होती है,

       नर पर नारी भारी।


🤔😇💃👣👓😜😃😂

-- 

ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़ किसी अपने का दामन...

ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़ किसी अपने का दामन... 



बहुत ही अच्छी स्टोरी है कृपया जरूर पढ़ें

.

एक जौहरी के निधन के बाद उसका

परिवार संकट में पड़ गया।😂😂

,

खाने के भी लाले पड़ गए।😇

,

एक दिन उसकी पत्नी ने अपने 💃बेटे

को नीलम का एक हार

देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की

दुकान पर ले जाओ।😂

,

कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।😛

,

💃बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।

,

👳चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख

परखकर कहा- बेटा,

मां से कहना कि अभी बाजार

बहुत मंदा है।😍

,

थोड़ा रुककर बेचना,

अच्छे दाम मिलेंगे।😍

,

उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि

तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।😁😁

,

अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान

पर जाने लगा और वहां हीरों

रत्नो की परख का काम सीखने लगा।😍😍

,

एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।

लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने

आने लगे।😍😍

,

एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी

मां से वह हार लेकर आना और कहना

कि अब बाजार बहुत तेज है,😍😍

,

उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।😁

,

मां से हार लेकर उसने परखा तो

पाया कि वह तो नकली है।😇😂

,

वह उसे घर पर ही छोड़ कर

दुकान लौट आया।😂😂

,

👳चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?

,

उसने कहा, वह तो नकली था।😊😍

,

तब 👳चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार

हार लेकर आये थे, तब मैं उसे

नकली बता देता तो तुम सोचते कि

आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा

हमारी चीज को भी नकली

बताने लगे।😍

,

आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो

पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।😍

,

सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में


हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं,

सब गलत है।😛😂

,

और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार

होकर रिश्ते बिगडते है।

Think and Live Long Relationship

ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़

किसी अपने का दामन.😇

,

ज़िंदगी बीत जाती है

अपनो को अपना बनाने में.😇

👉अगर ये कहानी आपका दिल छु गई तो बिना पोस्ट शेयर किये बिना मत रहिएगा।।

😍

Wednesday, 8 November 2017

सफलता के 20 मँत्र | 20 success mantra

सफलता के 20  मँत्र | 20 success mantra 

 

‬सफलता के 20  मँत्र

1.खुद की कमाई  से कम
          खर्च हो ऐसी जिन्दगी
          बनाओ..!
2. दिन  मेँ कम  से कम
           3 लोगो की प्रशंसा करो..!
3. खुद की भुल स्वीकारने
           मेँ कभी भी संकोच मत
           करो..!
4. किसी  के सपनो पर  हँसो
           मत..!
5. आपके पीछे खडे व्यक्ति
           को भी कभी कभी आगे
           जाने का मौका दो..!
6. रोज हो सके तो सुरज को
           उगता हुए देखे..!
7. खुब जरुरी हो तभी कोई
          चीज उधार लो..!
8. किसी के पास  से  कुछ
           जानना हो तो विवेक  से
           दो बार...पुछो..!
9. कर्ज और शत्रु को कभी
           बडा मत होने दो..!
10. ईश्वर पर पुरा भरोसा
             रखो..!
11. प्रार्थना करना कभी
             मत भुलो,प्रार्थना मेँ
             अपार शक्ति होती है..!
12. अपने काम  से मतलब
             रखो..!
13. समय सबसे ज्यादा
             कीमती है, इसको फालतु
             कामो  मेँ खर्च मत करो..
14. जो आपके पास है, उसी
             मेँ खुश रहना सिखो..!
15. बुराई कभी भी किसी कि
             भी मत करो,
             क्योकिँ  बुराई नाव  मेँ
             छेद समान  है,बुराई
             छोटी हो बडी नाव तो
             डुबो ही देती  है..!
16. हमेशा सकारात्मक सोच
             रखो..!
17. हर व्यक्ति एक हुनर
             लेकर  पैदा होता है बस
             उस हुनर को दुनिया के
             सामने लाओ..!
18. कोई काम छोटा नही
             होता हर काम बडा होता
             है जैसे कि सोचो जो
             काम आप कर रहे हो
             अगर वह काम
             आप नही करते हो तो
             दुनिया पर क्या असर
             होता..?
19. सफलता उनको ही
             मिलती  है जो कुछ
             करते  है
20. कुछ पाने के लिए कुछ
             खोना नही बल्कि  कुछ
             करना पडता 
आप इस मंत्र को भेजीये,
क्यों की   ज्ञ।न
बाँटने से बढ़ाता है

ना मारो इस नन्ही कलि को - Save girls save world...

ना मारो इस नन्ही कलि को - Save girls save world...

 

एक औरत गर्भ से थी
पति को जब पता लगा
की कोख में बेटी हैं तो
वो उसका गर्भपात
करवाना चाहते हैं
दुःखी होकर पत्नी अपने
पति से क्या कहती हैं :-
सुनो,
ना मारो इस नन्ही कलि को,
वो खूब सारा प्यार हम पर
लुटायेगी,
जितने भी टूटे हैं सपने,
फिर से वो सब सजाएगी..
सुनो,
ना मारो इस नन्ही कलि को,
जब जब घर आओगे
तुम्हे खूब हंसाएगी,
तुम प्यार ना करना
बेशक उसको,
वो अपना प्यार लुटाएगी..
सुनो
ना मारो इस नन्ही कलि को,
हर काम की चिंता
एक पल में भगाएगी,
किस्मत को दोष ना दो,
वो अपना घर
आंगन महकाएगी..
ये सब सुन पति
अपनी पत्नी को कहता हैं :-
सुनो
में भी नही चाहता मारना
इसनन्ही कलि को,
तुम क्या जानो,
प्यार नहीं हैं
क्या मुझको अपनी परी से,
पर डरता हूँ
समाज में हो रही रोज रोज
की दरिंदगी से..
क्या फिर खुद वो इन सबसे अपनी लाज बचा पाएगी,
क्यूँ ना मारू में इस कलि को,
वो बहार नोची जाएगी..
में प्यार इसे खूब दूंगा,
पर बहार किस किस से
बचाऊंगा,
जब उठेगी हर तरफ से
नजरें, तो रोक खुद को
ना पाउँगा..
क्या तू अपनी नन्ही परी को,
इस दौर में लाना चाहोगी,

जब तड़फेगी वो नजरो के आगे, क्या वो सब सह पाओगी,
क्यों ना मारू में अपनी नन्ही परी को, क्या बीती होगी उनपे,
जिन्हें मिला हैं ऐसा नजराना,
क्या तू भी अपनी परी को
ऐसी मौत दिलाना चाहोगी..

ये सुनकर गर्भ से
आवाज आती है…..ं
सुनो माँ पापा-
मैं आपकी बेटी हूँ
मेरी भी सुनो :-
पापा सुनो ना,
साथ देना आप मेरा,
मजबूत बनाना मेरे हौसले को,
घर लक्ष्मी है आपकी बेटी,
वक्त पड़ने पर मैं काली भी बन जाऊँगी
पापा सुनो,
ना मारो अपनी नन्ही कलि को, तुम उड़ान देना मेरे हर वजूद को,
में भी कल्पना चावला की तरह, ऊँची उड़ान भर जाऊँगी..
पापा सुनो,
ना मारो अपनी नन्ही कलि को, आप बन जाना मेरी छत्र छाया,
में झाँसी की रानी की तरह खुद की गैरो से लाज बचाऊँगी…

पति (पिता) ये सुन कर
मौन हो गया और उसने अपने फैसले पर शर्मिंदगी महसूस
करने लगा और कहता हैं
अपनी बेटी से :-

मैं अब कैसे तुझसे
नजरे मिलाऊंगा,
चल पड़ा था तेरा गला दबाने,
अब कैसे खुद को तेरेे सामने लाऊंगा,
मुझे माफ़ करना
ऐ मेरी बेटी, तुझे इस दुनियां में
सम्मान से लाऊंगा..

वहशी हैं ये दुनिया
तो क्या हुआ, तुझे मैं दुनिया की सबसे बहादुर बिटिया
बनाऊंगा.

मेरी इस गलती की
मुझे है शर्म,
घर घर जा के सबका
भ्रम मिटाऊंगा
बेटियां बोझ नहीं होती..
अब सारे समाज में
अलख जगाऊंगा!!!
Jokes to sabhi share karte hai aaj dekhta hoon is msg ko kon kon share karega.

Save girls save world...

पत्नी बार बार मां पर इल्जाम लगाए जा रही थी...

पत्नी बार बार मां पर इल्जाम लगाए जा रही थी... 


पत्नी बार बार मां पर इल्जाम लगाए जा रही थी......

और
पति बार बार उसको अपनी हद में
रहने की कह रहा था

लेकिन पत्नी चुप होने का नाम ही नही ले रही थी

व जोर जोर से चीख चीखकर कह रही थी कि





"उसने अंगूठी टेबल पर ही रखी थी
और तुम्हारेऔर मेरे अलावा इस कमरें मे कोई नही आया
अंगूठी हो ना हो मां जी ने ही उठाई है।





।बात जब पति की बर्दाश्त के बाहर हो गई तो





उसने पत्नी के गाल पर एक जोरदार तमाचा देमारा अभी


तीन महीने पहले ही तो शादी हुई थी ।

पत्नी से तमाचा सहन नही हुआ वह घर छोड़कर जाने लगी


और जाते जाते पति से एक सवाल पूछा

कि तुमको अपनी मां पर इतना विश्वास क्यूं है..??





तब पति ने जो जवाब दिया

उस जवाब को सुनकर



दरवाजे के पीछे खड़ी मां ने सुना







तो
उसका मन भर आया

पति ने पत्नी को बताया कि


"जब वह छोटा था तब उसके पिताजी गुजर गए
.
मां मोहल्ले के घरों मे झाडू पोछा लगाकर जो कमा पाती थी



उससे एक वक्त का खाना आता था



मां एक थाली में मुझे परोसा देती थी


और

खाली डिब्बे को ढककर रख देती थी




और
कहती थी





मेरी रोटियां इस डिब्बे में है बेटा तू खा ले



मैं भी हमेशा आधी रोटी खाकर कह देता था




कि मां मेरा पेट भर गया है मुझे और नही खाना है


मां ने मुझे मेरी झूठी आधी रोटी खाकर मुझे पाला पोसा और बड़ा किया है









आज मैं दो रोटी कमाने लायक हो  हूं

लेकिन यह कैसे भूल सकता हूं कि मां ने उम्र के उस पड़ाव पर अपनी इच्छाओं को मारा है,
.
.
..
वह मां आज उम्र के इस पड़ाव पर किसी अंगूठी की भूखी होगी ...

.यह मैं सोच भी नही सकता

तुम तो तीन महीने से मेरे साथ हो

मैंने तो मां की तपस्या को पिछले पच्चीस वर्षों से देखा है..

.यह सुनकर मां की आंखों से आंसू छलक उठे

वह समझ नही पा रही थी कि बेटा उसकी आधी रोटी का कर्ज चुका रहा है या वह बेटे
की आधी रोटी का फर्ज...
इस मैसज को शेयर करने के लिए कोई कसम नही है।।।
यदि अच्छा लगा हो ।।।।तभी शेयर करना ।
I love u mom

Tuesday, 7 November 2017

मनुष्य का छोटा सा जीवन | मूल्यवान जीवन | itgyanking.com

मनुष्य का छोटा सा जीवन | मूल्यवान जीवन | 

 

*मैसेज अच्छा है पड़ना जरूर*

छोटा सा जीवन है, लगभग 80 वर्ष।
उसमें से आधा =40 वर्ष तो रात को
बीत जाता है। उसका आधा=20 वर्ष
बचपन और बुढ़ापे मे बीत जाता है।
बचा 20 वर्ष। उसमें भी कभी योग,
कभी वियोग, कभी पढ़ाई,कभी परीक्षा,
नौकरी, व्यापार और अनेक चिन्ताएँ
व्यक्ति को घेरे रखती हैँ।अब बचा ही
कितना ? यदि हम
थोड़ी सी सम्पत्ति के लिए झगड़ा करें,
और फिर भी सारी सम्पत्ति यहीं छोड़ जाएँ,
तो इतना मूल्यवान मनुष्य जीवन
प्राप्त करने का क्या लाभ हुआ?

स्वयं विचार कीजिये :- इतना कुछ होते हुए भी,
1- शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
मौन होना सब से बेहतर है। 

2- दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
सफेद रंग सब से बेहतर है। 

3- खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है। 

4- देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है। 

5- सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है। 

6- जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतर है।

इंसान के अंदर जो समा जायें वो
             " स्वाभिमान "
                    और
जो इंसान के बाहर छलक जायें वो
             " अभिमान "
जब भी बड़ो के साथ बैठो तो   
      परमेश्वर का धन्यवाद करो ,
     क्योंकि कुछ लोग
      इन लम्हों को तरसते हैं ।
जब भी अपने काम पर जाओ
      तो परमेश्वर का धन्यवाद करो
     क्योंकि
     बहुत से लोग बेरोजगार हैं ।
 परमेश्वर का धन्यवाद कहो
     जब तुम तन्दुरुस्त हो ,
     क्योंकि बीमार किसी भी कीमत पर सेहत खरीदने की ख्वाहिश रखते हैं ।
 परमेश्वर का धन्यवाद कहो
      की तुम जिन्दा हो ,
      क्योंकि मरते हुए लोगों से पूछो
      जिंदगी की कीमत क्या है।
दोस्तों की ख़ुशी के लिए तो कई मैसेज भेजते हैं । देखते हैं परमेश्वर के धन्यवाद का ये मैसेज कितने लोग शेयर करते हैं !

Sunday, 5 November 2017

आरक्षण की वर्तमान स्थिति | Current status of reservation

आरक्षण की वर्तमान स्थिति | Current status of reservation 

itkendra.net


जिसको आरक्षण दिया जा रहा है वो सामान्य आदमी बन ही नहीं पा रहा है....
जैसे किसी व्यक्ति को आरक्षण दिया गया और वो किसी सरकारी नौकरी में आ गया!अब उसका वेतन 5500 से 50000 तक महीना है पर जब उसकी संतान हुई तो फिर वही से शुरुआत !
फिर वही गरीब पिछड़ा और सवर्णों के अत्याचार का मारा पैदा हुआ ।
उसका पिता लाखों रूपए सालाना कमा रहा है तथा उच्च पद पर आसीन है।सारी सरकारी सुविधाए ले रहा है।
वो खुद जिले के सबसे अच्छे स्कूल में पढ़ रहा है और सरकार उसे पिछड़ा मान रही है।
सदियों से सवर्णों के अत्याचार का शिकार मान रही है।
आपको आरक्षण देना है बिलकुल दो पर उसे नौकरी देने के बाद सामान्य तो बना दो ।
यह आरक्षण कब तक मिलता रहेगा उसे ?? इसकी भी कोई समय सीमा तो तय कर दो कि बस जाति विशेष में पैदा हो गया तो आरक्षण का हकदार हो गया।
*दादा जी जुल्म के मारे,
बाप जुल्म का मारा तथा पोता भी जुल्म का मारा!
वाह रे मेरे देश का दु:भा्ग्य!*
जिस आरक्षण से उच्च पदस्थ अधिकारी , मन्त्री , प्रोफेसर , इंजीनियर, डॉक्टर भी पिछड़े ही रह जायें, ऐसे असफल अभियान को तुरंत बंद कर देना चाहिए ।
जिस कार्य से कोई आगे न बढ़ रहा हो उसे जारी रखना मूर्खतापूर्ण कार्य है।
हम में से कोई भी आरक्षण के खिलाफ नहीं, पर आरक्षण का आधार जातिगत ना होकर आर्थिक होना चाहिए।
""ऒर तत्काल प्रभाव से प्रमोशन में आरक्षण तो बंद होना ही चाहिए।नैतिकता भी यही कहती है।""
क्या कभी ऐसा हुआ है कि किसी मंदिर में प्रसाद बँट रहा हो तो एक व्यक्ति को चार बार मिल जाये ,और एक व्यक्ति लाइन में रहकर अपनी बारी का इंतजार ही करता रहे।
आरक्षण देना है तो उन गरीबों ,लाचारों को चुन चुन के दो जो बेचारे दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं...चाहे वे अनपढ़ हो । चौकीदार , सफाई कर्मचारी ,सेक्युरिटी गार्ड कैसी भी नौकरी दो....हमें कोई आपत्ति नहीं।
ऐसे लोंगो को मुख्य धारा में लाना सरकार का सामाजिक उत्तरदायित्व है।
परन्तु भरे पेट वालों को बार बार 56 व्यंजन परोसने की यह नीति बंद होनी ही चाहिए।
जिसे एक बार आरक्षण मिल गया उसकी अगली पीढ़ियों को सामान्य मानना चाहिये और आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिये।
क्या आप भी सहमत हैं ?
*यदि हां तो आगे Share करना न भूलें!*

शयन विधान - धर्म ग्रंथों में | Shayan Vidhan - Dharm Grantho me

शयन विधान - धर्म ग्रंथों में  

 

*शयन विधान*

*सूर्यास्त के एक प्रहर (लगभग 3 घंटे) के बाद ही शयन करना।*
*सोने की मुद्रा:* 
           *उल्टा सोये भोगी,*
           *सीधा सोये योगी,*
           *डाबा सोये निरोगी,*
           *जीमना सोये रोगी।*
*शास्त्रीय विधान भी है।*
*आयुर्वेद में ‘वामकुक्षि’ की  बात आती हैं,*  
*बायीं करवट सोना स्वास्थ्य के लिये हितकर हैं।*
*शरीर विज्ञान के अनुसार चित सोने से रीढ़ की हड्डी को नुकसान और औधा या ऊल्टा सोने से आँखे बिगडती है।*
*सोते समय कितने गायत्री मंन्त्र /नवकार मंन्त्र गिने जाए :-*
*"सूतां सात, उठता आठ”सोते वक्त सात भय को दूर करने के लिए सात मंन्त्र गिनें और उठते वक्त आठ कर्मो को दूर करने के लिए आठ मंन्त्र गिनें।*
*"सात भय:-"*
*इहलोक,परलोक,आदान,*
*अकस्मात ,वेदना,मरण ,*
*अश्लोक (भय)*
*दिशा घ्यान:-*
*दक्षिणदिशा (South) में पाँव रखकर कभी सोना नहीं । यम और दुष्टदेवों का निवास है ।कान में हवा भरती है । मस्तिष्क  में रक्त का संचार कम को जाता है स्मृति- भ्रंश,मौत व असंख्य बीमारियाँ होती है।*
*यह बात वैज्ञानिकों ने एवं वास्तुविदों ने भी जाहिर की है।*
*1:- पूर्व ( E ) दिशा में मस्तक रखकर सोने से विद्या की प्राप्ति होती है।*
*2:-दक्षिण ( S ) में मस्तक रखकर सोने से धनलाभ व आरोग्य लाभ होता है ।*
*3:-पश्चिम( W ) में मस्तक रखकर सोने से प्रबल चिंता होती है ।*
 *4:-उत्तर ( N ) में मस्तक रखकर  सोने से मृत्यु और हानि होती है ।*
*अन्य धर्गग्रंथों में शयनविधि में और भी बातें सावधानी के तौर पर बताई गई है ।*

*विशेष शयन की सावधानियाँ:-*

*1:-मस्तक और पाँव की तरफ दीपक रखना नहीं। दीपक बायीं या दायीं और कम से कम 5 हाथ दूर होना चाहिये।*
*2:-सोते समय मस्तक दिवार से कम से कम 3 हाथ दूर होना चाहिये।*
*3:-संध्याकाल में निद्रा नहीं लेनी।*
*4:-शय्या पर बैठे-बैठे निद्रा नहीं लेनी।*
*5:-द्वार के उंबरे/ देहरी/थलेटी/चौकट पर मस्तक रखकर नींद न लें।*
*6:-ह्रदय पर हाथ रखकर,छत के पाट या बीम के नीचें और पाँव पर पाँव चढ़ाकर निद्रा न लें।*
*7:-सूर्यास्त के पहले सोना नहीं।*
*7:-पाँव की और शय्या ऊँची हो  तो  अशुभ  है।  केवल चिकित्स  उपचार हेतु छूट हैं ।*
*8:- शय्या पर बैठकर खाना-पीना अशुभ है। (बेड टी पीने वाले सावधान)*
*9:- सोते सोते पढना नहीं।*
*10:-सोते-सोते तंम्बाकू चबाना नहीं। (मुंह में गुटखा रखकर सोने वाले चेत जाएँ )*
*11:-ललाट पर तिलक रखकर सोना अशुभ है (इसलिये सोते वक्त तिलक मिटाने का कहा जाता है। )*
*12:-शय्या पर बैठकर सरोता से सुपारी के टुकड़े करना अशुभ हैं।*
*प्रत्येक व्यक्ति यह ज्ञान को प्राप्त कर सके इसलिए शेयर अवश्य करे |*

एक पार्क मे दो बुजुर्ग बातें कर रहे थे- परिवार का महत्त्व

एक पार्क मे दो बुजुर्ग  बातें कर रहे थे- परिवार का महत्त्व

 

एक पार्क मे दो बुजुर्ग  बातें कर रहे थे....
पहला :- मेरी एक पोती है, शादी के लायक है... BE किया है, नौकरी करती है, कद - 5"2 इंच है.. सुंदर है
कोई लडका नजर मे हो तो बताइएगा..
दूसरा :- आपकी पोती को किस तरह का परिवार चाहिए...??
पहला :- कुछ खास नही.. बस लडका ME /M.TECH किया हो, अपना घर हो, कार हो, घर मे एसी हो, अपने बाग बगीचा हो, अच्छा job, अच्छी सैलरी, कोई लाख रू. तक हो...
दूसरा :- और कुछ...
पहला :- हाँ सबसे जरूरी बात.. अकेला होना चाहिए..

 मां-बाप,भाई-बहन नही होने चाहिए..
वो क्या है लडाई झगड़े होते है...
दूसरे बुजुर्ग की आँखें भर आई फिर आँसू पोछते हुए बोला - मेरे एक दोस्त का पोता है उसके भाई-बहन नही है, मां बाप एक दुर्घटना मे चल बसे, अच्छी नौकरी है, डेढ़ लाख सैलरी है, गाड़ी है बंगला है, नौकर-चाकर है..
पहला :- तो करवाओ ना रिश्ता पक्का..
दूसरा :- मगर उस लड़के की भी यही शर्त है की लडकी के भी मां-बाप,भाई-बहन या कोई रिश्तेदार ना हो...
कहते कहते उनका गला भर आया..
फिर बोले :- अगर आपका परिवार आत्महत्या कर ले तो बात बन सकती है.. आपकी पोती की शादी उससे हो जाएगी और वो बहुत सुखी रहेगी....
पहला :- ये क्या बकवास है, हमारा परिवार क्यों करे आत्महत्या.. कल को उसकी खुशियों मे, दुःख मे कौन उसके साथ व उसके पास होगा...
दूसरा :- वाह मेरे दोस्त, खुद का परिवार, परिवार है और दूसरे का कुछ नही... मेरे दोस्त अपने बच्चो को परिवार का महत्व समझाओ, घर के बडे ,घर के छोटे सभी अपनो के लिए जरूरी होते है... वरना इंसान खुशियों का और गम का महत्व ही भूल जाएगा, जिंदगी नीरस बन जाएगी...
पहले वाले बुजुर्ग बेहद शर्मिंदगी के कारण कुछ नही बोल पाए...
दोस्तों परिवार है तो जीवन मे हर खुशी, खुशी लगती है अगर परिवार नही तो किससे अपनी खुशियाँ और गम बांटोगे.

Saturday, 4 November 2017

विचित्र दुनिया का कठोर सत्य... Nice Lines

विचित्र दुनिया का कठोर सत्य...



।। लाश को हाथ लगाता है तो नहाता है ...
पर बेजुबान जीव को मार के खाता है ।।

यह मंदिर-मस्ज़िद भी क्या गजब की जगह है दोस्तो.
जंहा गरीब बाहर और अमीर अंदर 'भीख' मांगता है..
 बारात मे दुल्हे सबसे पीछे
      और दुनिया  आगे चलती है
मय्यत मे जनाजा आगे
        और दुनिया पीछे चलती है..
           यानि दुनिया खुशी मे आगे
          और दुख मे पीछे हो जाती है..!

अजब तेरी दुनिया
गज़ब तेरा खेल
मोमबत्ती जलाकर मुर्दों को याद करना
और मोमबत्ती बुझाकर जन्मदिन मनाना...
Wah re duniya !!!!!
✴ लाइन छोटी है,पर मतलब बहुत बड़ा है ~
उम्र भर उठाया बोझ उस कील ने ...
और लोग तारीफ़ तस्वीर की करते रहे ..
〰〰〰〰〰〰
✴  पायल हज़ारो रूपये में आती है, पर पैरो में पहनी जाती है
और.....
बिंदी 1 रूपये में आती है मगर माथे पर सजाई जाती है
इसलिए कीमत मायने नहीं रखती उसका कृत्य मायने रखता हैं.

〰〰〰〰〰〰
✴  एक किताबघर में पड़ी गीता और कुरान आपस में कभी नहीं लड़ते,
और
जो उनके लिए लड़ते हैं वो कभी उन दोनों को नहीं पढ़ते....

〰〰〰〰〰〰〰〰
✴  नमक की तरह कड़वा ज्ञान देने वाला ही सच्चा मित्र होता है,
मिठी बात करने वाले तो चापलुस भी होते है।
इतिहास गवाह है की आज तक कभी नमक में कीड़े नहीं पड़े।
और मिठाई में तो अक़्सर कीड़े पड़ जाया करते है...

〰〰〰〰〰〰〰
✴  अच्छे मार्ग पर कोई व्यक्ति नही जाता पर बुरे मार्ग पर सभी जाते है......
*इसीलिये दारू बेचने वाला कहीं नही जाता ,*
*पर दूध बेचने वाले को घर-घर
गली -गली,कोने- कोने जाना पड़ता है*

〰〰〰〰〰〰〰〰
✴  दूध वाले से बार -बार पूछा जाता है कि पानी तो नही डाला ?
पर दारू मे खुद हाथो से पानी मिला-मिला कर पीते है ।

〰〰〰


*Very nice line*
इंसान की समझ सिर्फ इतनी हैं
कि उसे "जानवर" कहो तो
नाराज हो जाता हैं और
"शेर" कहो तो खुश हो जाता हैं!

Friday, 3 November 2017

एक गरीब परिवार - गरीबो की मदद करे | A poor family - help poor people

एक गरीब परिवार - गरीबो की मदद करे

A poor family - help poor people 

 

एक गरीब FAMILY थी..!
जिस मे 5 लोग थे...।
माँ बाप और 3 बच्चे
बाप हमेशा बीमार रहता था ।
एक दिन वो मर गया ।
3 दिन तक
पड़ोसियों ने खाना भेजा ।
बाद में
भूखे रहने के दिन आ गए..।
माँ ने कुछ दिन तक जैसे तैसे
बच्चों को खाना खिलाया ।
लेकिन कब तक
आखिर फिर से भूखे रहना पड़ा ।
जिस की वजह से
8 साल का बेटा बीमार हो गया ।
और
बिस्तर पकड़ लिया....।
एक दिन 5 साल की बच्ची ने
माँ के कान में पूछा ।
•
•
माँ भाई कब मरेगा....??
माँ ने तड़प कर पूछा,
ऐसा क्यों पूछ रही हो.....??
बच्ची ने बड़ी मासूमियत से
जवाब दिया,
जिसे सुन कर
आप की आँखों में
आँसु आ जायेंगे...!
•
•
•
•
बच्ची का जवाब था ।
•
•
" माँ भाई मरेगा तो घर में
खाना आएगा ना...!"
भुख दुनिया में सबसे बड़ी है।
सुबह मिटाओ शाम को फिर खड़ी है।।
आपके खाने में गरीबो का भी
हक है ।
गरीबो की मदद करे
जो दुसरो के मोहताज़ है...।
अगर आप
हर massege,
Shaayri
SHARE करते हो...
थोडा टाइम निकाल कर
इस पोस्ट को भी
SHARE कर दीजिये..!
भगवान...
हम सब की मुसीबत टाल दे ।
और जो कोई भी
इस मेसेज को
आगे बढ़ा रहा है..।
Bhaghwan  उसकी
हर परेसानी को दूर कर दे..!!!

Wednesday, 1 November 2017

मूर्खों के लक्षण सोशल मीडिया पर | Signs of fools on social media

मूर्खों के लक्षण सोशल मीडिया पर

Signs of fools on social media 

itkendra.net

 

*मूर्खों के लक्षण*

*महा निकम्मे* = फ्री में बैलेंस, मोबाइल, pendrive, T-shirt, झुनझुना आदि के लिए मैसेज भेजते रहते  हैं, जो इन्हें कभी नहीं मिलते। 

*महा मूर्ख* =ये 2-2 साल पुराने मैसेज को मार्किट में नया है कहकर फारवर्ड करते रहते हैं। जैसे फलां जगह बच्ची मिली है इसे घर वालों तक पहुंचाओ। इनमें तारीख़ नहीं होती। तारीख़ होती तो पोल खुल जाती। 

*कुछ पागल* = ऐसे एक्सीडेंट की खबरे भेजते हैं, जो 2 साल पहले हुआ था। इनमें भी तारीख़ कभी नहीं होती। 

*महा बेवकूफ*  =व्यर्थ की साईं इमेज, फूल, पत्ती या 1121 ॐ लिखकर कसम देकर लोगों को फारवर्ड करके अपनी बला ग्रुप के मेम्बरों पर चिपकाते हैं। ( *क्या मिलता है भाई???*)

*महा मंद बुद्धि*  ="पुजारी मंदिर में पूजा कर रहा था फिर एक सांप/बन्दर आया और उसने इंसान का रूप ले लिया" इसे आगे भेजो लाटरी निकल जायेगी। *(अरे मूर्ख तेरी ही नहीं निकली तो दूसरे की क्या खाक निकलेगी?)*

*कुछ मंदबुद्धि*  =अभी अभी पैदा हुए बच्चे के गले में आलपिन फंस गई, 50 लाख लगेंगे *बच्चे के गले में आलपिन कौन डालेगा* ? *कौनसे ऑपरेशन में 50 लाख लगते हैं भाई ?*  ऊपर से बोलेंगे कि *प्रति शेयर 50 पैसा* व्हाट्सऐप की तरफ से मिलेगा। जबकि सच्चाई ये है की व्हाट्सएप्प को 19 बिलियन डॉलर में खरीदने वाले मार्क जकरबर्ग को इससे अभी 25 पैसे नही मिलते। 

सबसे बड़ी *बेवकूफी* तो तब होती है जब कोई कहता है कि- "मैसेज आगे भेजो आपकी बैटरी फुल चार्ज हो जायगी"/ *घोडा दौड़ने लगेगा*, भैंस का रंग बदल जायेगा या  ताला खुल जायेगा। *(भाई physics नाम की भी कोई चीज़ होती है।)* 

*कुछ लल्लू* = किसी आदमी के डॉक्यूमेंट, डिग्रियाँ गिर गए हैं, ये मैसेज उस तक पहुचाने में मदद करें. *(अरे मंदबुद्धि डॉक्यूमेंट आधार कार्ड ,अंकसूचि,परिचय पत्र  में उसका पता नहीं है क्या???)*
यदि इनमें से कोई भी लक्षण आप में हैं, तो आप भी Whatsapp पर अपनी अल्प बुद्धि का परिचय दे रहे हैं। 

*अनावश्यक पोस्ट डालकर मोबाइल को कूड़ाघर नहीं बनायें। कोई भी msg पोस्ट करने से पहले सोच लें कि आप क्या पोस्ट कर रहे हैं। थोड़ा अपना दिमाग लगाएँ।*              

*अगर आपको भी बेकार के मैसेज से बचना है तो इसे अन्य ग्रुप में भेजो ताकि मंदबुद्धि उन्हें पढ़  लें। आपको फालतू के msg आना बंद हो जायेंगे। और ऐसे पागलो से पीछा छूट जायेगा*

महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी | Some interesting information about Maharana Pratap

 महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी

Some interesting information about Maharana Pratap 

 
itkendra.net

 महाराणा प्रताप के बारे में कुछ रोचक जानकारी:-

1... महाराणा प्रताप एक ही झटके में घोड़े समेत दुश्मन सैनिक को काट डालते थे।
2.... जब इब्राहिम लिंकन भारत दौरे पर आ रहे थे ।  तब उन्होने अपनी माँ से पूछा कि- हिंदुस्तान से आपके लिए क्या लेकर आए ? तब माँ का जवाब मिला- ”उस महान देश की वीर भूमि हल्दी घाटी से एक मुट्ठी धूल लेकर आना,  जहाँ का राजा अपनी प्रजा के प्रति इतना वफ़ादार था कि उसने आधे हिंदुस्तान के बदले अपनी मातृभूमि को चुना ।”
लेकिन बदकिस्मती से उनका वो दौरा रद्द हो गया था |
“बुक ऑफ़ प्रेसिडेंट यु एस ए ‘ किताब में आप यह बात पढ़ सकते हैं |
3.... महाराणा प्रताप के भाले का वजन 80 किलोग्राम था और कवच का वजन भी 80 किलोग्राम ही था|
कवच, भाला, ढाल, और हाथ में तलवार का वजन मिलाएं तो कुल वजन 207 किलो था।
4.... आज भी महाराणा प्रताप की तलवार कवच आदि सामान उदयपुर राज घराने के संग्रहालय में सुरक्षित हैं |
5.... अकबर ने कहा था कि अगर राणा प्रताप मेरे सामने झुकते है, तो आधा हिंदुस्तान के वारिस वो होंगे,  पर बादशाहत अकबर की ही रहेगी|
लेकिन महाराणा प्रताप ने किसी की भी अधीनता स्वीकार करने से मना कर दिया |
6.... हल्दी घाटी की लड़ाई में मेवाड़ से 20000 सैनिक थे और अकबर की ओर से 85000 सैनिक युद्ध में सम्मिलित हुए |
7.... महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक का मंदिर भी बना हुआ है,  जो आज भी हल्दी घाटी में सुरक्षित है |
8.... महाराणा प्रताप ने जब महलों का त्याग किया तब उनके साथ लुहार जाति के हजारो लोगों ने भी घर छोड़ा और दिन रात राणा कि फौज के लिए तलवारें बनाईं | इसी
समाज को आज गुजरात मध्यप्रदेश और राजस्थान में गाढ़िया लोहार कहा जाता है|
मैं नमन करता हूँ ऐसे लोगो को |
9.... हल्दी घाटी के युद्ध के 300 साल बाद भी वहाँ जमीनों में तलवारें पाई गई।
आखिरी बार तलवारों का जखीरा 1985 में हल्दी घाटी में मिला था |
10..... महाराणा प्रताप को शस्त्रास्त्र की शिक्षा "श्री जैमल मेड़तिया जी" ने दी थी,  जो 8000 राजपूत वीरों को लेकर 60000 मुसलमानों से लड़े थे। उस युद्ध में 48000 मारे गए थे । जिनमे 8000 राजपूत और 40000 मुग़ल थे |
11.... महाराणा के देहांत पर अकबर भी रो पड़ा था |
12.... मेवाड़ के आदिवासी भील समाज ने हल्दी घाटी में
अकबर की फौज को अपने तीरो से रौंद डाला था । वो महाराणा प्रताप को अपना बेटा मानते थे और राणा बिना भेदभाव के उन के साथ रहते थे ।
आज भी मेवाड़ के राजचिन्ह पर एक तरफ राजपूत हैं, तो दूसरी तरफ भील |
13..... महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक महाराणा को 26 फीट का दरिया पार करने के बाद वीर गति को प्राप्त हुआ | उसकी एक टांग टूटने के बाद भी वह दरिया पार कर गया। जहाँ वो घायल हुआ वहां आज खोड़ी इमली नाम का पेड़ है, जहाँ पर चेतक की मृत्यु हुई वहाँ चेतक मंदिर है |
14..... राणा का घोड़ा चेतक भी बहुत ताकतवर था उसके
मुँह के आगे दुश्मन के हाथियों को भ्रमित करने के लिए हाथी की सूंड लगाई जाती थी । यह हेतक और चेतक नाम के दो घोड़े थे|
15..... मरने से पहले महाराणा प्रताप ने अपना खोया हुआ 85 % मेवाड फिर से जीत लिया था । सोने चांदी और महलो को छोड़कर वो 20 साल मेवाड़ के जंगलो में
घूमे ।
16.... महाराणा प्रताप का वजन 110 किलो और लम्बाई 7’5” थी, दो म्यान वाली तलवार और 80 किलो का भाला रखते थे हाथ में।
महाराणा प्रताप के हाथी
की कहानी:
मित्रो, आप सब ने महाराणा
प्रताप के घोड़े चेतक के बारे
में तो सुना ही होगा,
लेकिन उनका एक हाथी
भी था। जिसका नाम था रामप्रसाद। उसके बारे में आपको कुछ बाते बताता हुँ।
रामप्रसाद हाथी का उल्लेख
अल- बदायुनी, जो मुगलों
की ओर से हल्दीघाटी के
युद्ध में लड़ा था ने अपने एक ग्रन्थ में किया है।
वो लिखता है की- जब महाराणा प्रताप पर अकबर ने चढाई की थी,  तब उसने दो चीजो को ही बंदी बनाने की मांग की थी ।
एक तो खुद महाराणा
और दूसरा उनका हाथी
रामप्रसाद।
आगे अल बदायुनी लिखता है
की-  वो हाथी इतना समझदार व ताकतवर था की उसने हल्दीघाटी के युद्ध में अकेले ही अकबर के 13 हाथियों को मार गिराया था ।
वो आगे लिखता है कि-
उस हाथी को पकड़ने के लिए
हमने 7 बड़े हाथियों का एक
चक्रव्यूह बनाया और उन पर
14 महावतो को बिठाया,  तब कहीं जाकर उसे बंदी बना पाये।
अब सुनिए एक भारतीय
जानवर की स्वामी भक्ति।
उस हाथी को अकबर के समक्ष पेश किया गया ।
जहा अकबर ने उसका नाम पीरप्रसाद रखा।
रामप्रसाद को मुगलों ने गन्ने
और पानी दिया।
पर उस स्वामिभक्त हाथी ने
18 दिन तक मुगलों का न
तो दाना खाया और न ही
पानी पिया और वो शहीद
हो गया।
तब अकबर ने कहा था कि-
जिसके हाथी को मैं अपने सामने नहीं झुका पाया, 
उस महाराणा प्रताप को क्या झुका पाउँगा.?
इसलिए मित्रो हमेशा अपने
भारतीय होने पे गर्व करो।
पढ़कर सीना चौड़ा हुआ हो
तो शेयर कर देना।

Saturday, 28 October 2017

सत्य वचन | true words | VERY NICE LINE

सत्य वचन | true words | VERY NICE LINE


 

*_VERY NICE LINE_*

*_JARUR PADHE_*
एक दिन चिड़िया बोली - मुझे छोड़ कर कभी उड़ तो नहीं जाओगे❣
चिड़ा ने कहा - उड़
जाऊं तो तुम पकड़ लेना.❣
चिड़िया-मैं तुम्हें पकड़
तो सकती हूँ,
पर फिर पा तो नहीं सकती...❣
यह सुन चिड़े की आँखों में आंसू आ गए और उसने अपने पंख तोड़ दिए और बोला अब हम
हमेशा साथ रहेंगे,❣
लेकिन एक दिन जोर से तूफान आया,
चिड़िया उड़ने लगी तभी चिड़ा बोला तुम उड़
जाओ मैं नहीं उड़ सकता..❣
चिड़िया- अच्छा अपना ख्याल रखना, कहकर
उड़ गई !❣
जब तूफान थमा और चिड़िया वापस
आई तो उसने देखा की चिड़ा मर चुका था❣
❣और एक डाली पर लिखा था...❣
✍काश तुम एक बार तो कहती कि मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकती""❣
तो शायद मैं तूफ़ान आने से
पहले नहीं मरता❣
""

ज़िन्दगी के पाँच सच ~

सच नं. 1 -:
माँ के सिवा कोई वफादार नही हो सकता…!!!❣
────────────────────────
सच नं. 2 -:
गरीब का कोई दोस्त नही हो सकता…!!❣
────────────────────────
सच नं. 3 -:
आज भी लोग अच्छी सोच को नही,
अच्छी सूरत को तरजीह देते हैं…!!!❣
────────────────────────
सच नं. 4 -:
इज्जत सिर्फ पैसे की है, इंसान की नही…!!!❣
────────────────────────
सच न. 5 -:
जिस शख्स को अपना खास समझो….
अधिकतर वही शख्स दुख दर्द देता है…❣
❣❣

गीता में लिखा है कि.......

✍अगर कोई इन्सान
बहुत हंसता है , तो अंदर से वो बहुत अकेला है❣
अगर कोई इन्सान बहुत सोता है , तो अंदर से
वो बहुत उदास है❣
✍अगर कोई इन्सान खुद को बहुत मजबूत दिखाता है और रोता नही , तो वो
अंदर से बहुत कमजोर है❣
✍अगर कोई जरा जरा सी
बात पर रो देता है तो वो बहुत मासूम और नाजुक दिल का है❣
✍अगर कोई हर बात पर
नाराज़ हो जाता है तो वो अंदर से बहुत अकेला
और जिन्दगी में प्यार की कमी महसूस करता है❣
लोगों को समझने की कोशिश कीजिये ,जिन्दगी किसी का इंतज़ार नही करती ,❣
❣लोगों को एहसास कराइए की वो आप के लिए कितने खास है सर...❣
1. अगर जींदगी मे कुछ पाना हो तो,,, तरीके बदलो....., ईरादे नही..❣
2. जब सड़क पर बारात नाच रही हो तो हॉर्न मार-मार के परेशान ना हो...... गाडी से उतरकर थोड़ा नाच लें..., मन शान्त होगा।
टाइम तो उतना लगना ही है..❣
3. इस कलयुग में रूपया चाहे कितना भी गिर जाए, इतना कभी नहीं गिर पायेगा, जितना रूपये के लिए इंसान गिर चूका है...❣

सत्य वचन

4. रास्ते में अगर मंदिर देखो तो,,, प्रार्थना नहीं करो तो चलेगा . . पर रास्ते में एम्बुलेंस मिले तब प्रार्थना जरूर करना,,, शायद कोई
जिन्दगी बच जाये.....❣
5. जिसके पास उम्मीद हैं, वो लाख बार हार के भी, नही हार सकता..❣
6. बादाम खाने से उतनी अक्ल नहीं आती...
जितनी धोखा खाने से आती है...❣
7. एक बहुत अच्छी बात जो जिन्दगी भर याद रखिये,,, आप का खुश रहना ही आप का बुरा चाहने वालों के लिए सबसे बड़ी सजा है....❣
8. खुबसूरत लोग हमेशा अच्छे नहीं होते, अच्छे लोग हमेशा खूबसूरत नहीं होते...❣
9. रिश्ते और रास्ते एक ही सिक्के के दो पहलु हैं... कभी रिश्ते निभाते निभाते रास्ते खो जाते हैं,,, और कभी रास्तो पर चलते चलते रिश्ते बन जाते हैं...❣
10. बेहतरीन इंसान अपनी मीठी जुबान से ही जाना जाता है,,,, वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती है...❣
11. दुनिया में कोई काम "impossible" नहीं,,, बस होसला और मेहनत की जरूरत
 अपने सभी दोस्तो को सेन्ड करे वरना ,
 ये मेसेज आपके लिये फिजूल ह

Monday, 23 October 2017

अनमोल वचन-धीरे धीरे पढिये पसंद आएगा

अनमोल वचन-धीरे धीरे पढिये पसंद आएगा

 

*धीरे धीरे पढिये पसंद आएगा...*

मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मागना क्योंकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का.....
कल एक इन्सान रोटी मांगकर ले गया और करोड़ों कि दुआयें दे गया, पता ही नहीँ चला की, गरीब वो था की मैं.... 
जिस घाव से खून नहीं निकलता, समझ लेना वो ज़ख्म किसी अपने ने ही दिया है..
बचपन भी कमाल का था खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी...
खोए हुए हम खुद हैं, और ढूंढते भगवान को हैं...女女女女女女女女女女女女女女
अहंकार दिखा के किसी रिश्ते को तोड़ने से अच्छा है कि माफ़ी मांगकर वो रिश्ता निभाया जाये....
जिन्दगी तेरी भी अजब परिभाषा है.. सँवर गई तो जन्नत, नहीं तो सिर्फ तमाशा है...
खुशीयाँ तकदीर में होनी चाहिये, तस्वीर मे तो हर कोई मुस्कुराता है...
ज़िंदगी भी वीडियो गेम सी हो गयी है एक लेवल क्रॉस करो तो अगला लेवल और मुश्किल आ जाता हैं.....
इतनी चाहत तो लाखों रुपये पाने की भी नही होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है.......
हमेशा छोटी छोटी गलतियों से बचने की कोशिश किया करो, क्योंकि इन्सान पहाड़ो से नहीं पत्थरों से ठोकर खाता है..
*मनुष्य का अपना क्या है ?*
*जन्म :-*     दुसरो ने दिया
*नाम  :-*     दुसरो ने रखा
*शिक्षा :-*    दुसरो ने दी
*रोजगार :-* दुसरो ने दिया और
*शमशान :-* दुसरे ले जाएंगे
तो व्यर्थ में घमंड किस बात पर करते है लोग 
*❤दिल को छुआ हो तो शेयर अवश्य करें 