adnow

loading...

Saturday, 7 July 2018

औरत का सफर - Aurat ka Safar

बाबुल का घर छोड़ कर पिया के घर आती है..


☺एक लड़की जब शादी कर औरत बन जाती है..

अपनों से नाता तोड़कर किसी गैर को अपनाती है..

☺अपनी ख्वाहिशों को जलाकर किसी और के सपने सजाती है..

☺सुबह सवेरे जागकर सबके लिए चाय बनाती है..

नहा धोकर फिर सबके लिए नाश्ता बनाती है..

☺पति को विदा कर बच्चों का टिफिन सजाती है..

झाडू पोछा निपटा कर कपड़ों पर जुट जाती है..

पता ही नही चलता कब सुबह से दोपहर हो जाती है..

☺फिर से सबका खाना बनाने किचन में जुट जाती है..

☺सास ससुर को खाना परोस स्कूल से बच्चों को लाती है..

बच्चों संग हंसते हंसते खाना खाती और खिलाती है..

☺फिर बच्चों को टयूशन छोड़,थैला थाम बाजार जाती है..

☺घर के अनगिनत काम कुछ देर में निपटाकर आती है..

पता ही नही चलता कब दोपहर से शाम हो जाती है..

सास ससुर की चाय बनाकर फिर से चौके में जुट जाती है..

☺खाना पीना निपटाकर फिर बर्तनों पर जुट जाती है..

सबको सुलाकर सुबह उठने को फिर से वो सो जाती है..

हैरान हूं दोस्तों ये देखकर सौलह घंटे ड्यूटी बजाती है..

फिर भी एक पैसे की पगार नही पाती है..

ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत का मजाक उडाती है..

ना जाने क्यूं दुनिया उस औरत पर चुटकुले बनाती है..

जो पत्नी मां बहन बेटी ना जाने कितने रिश्ते निभाती है..

सबके आंसू पोंछती है लेकिन खुद के आंसू छुपाती है..

*नमन है मेरा घर की उस लक्ष्मी को जो घर को स्वर्ग बनाती है..☺*

*☺ड़ोली में बैठकर आती है और अर्थी पर लेटकर जाती

इसे तो शेयर करना आप का फर्ज बनता हैं नहीं तो आप का व्हाटसऐप चलाना बेकार हैं


Friday, 6 July 2018

मृत्यु टाले न टले

 

(  मृत्यु टाले न टले )

भगवान विष्णु गरुड़ पर बैठ कर कैलाश पर्वत पर गए।
द्वार पर गरुड़ को छोड़ कर खुद शिव से मिलने अंदर
चले गए। तब कैलाश की अपूर्व प्राकृतिक शोभा
को देख कर गरुड़ मंत्रमुग्ध थे कि तभी उनकी नजर
एक खूबसूरत छोटी सी चिड़िया पर पड़ी।
चिड़िया कुछ इतनी सुंदर थी कि गरुड़ के सारे
विचार उसकी तरफ आकर्षित होने लगे।
उसी समय कैलाश पर यम देव पधारे और अंदर जाने से
पहले उन्होंने उस छोटे से पक्षी को आश्चर्य की
द्रष्टि से देखा। गरुड़ समझ गए उस चिड़िया का अंत
निकट है और यमदेव कैलाश से निकलते ही उसे अपने
साथ यमलोक ले जाएँगे।
गरूड़ को दया आ गई। इतनी छोटी और सुंदर
चिड़िया को मरता हुआ नहीं देख सकते थे। उसे अपने
पंजों में दबाया और कैलाश से हजारो कोश दूर एक
जंगल में एक चट्टान के ऊपर छोड़ दिया, और खुद
बापिस कैलाश पर आ गया।
आखिर जब यम बाहर आए तो गरुड़ ने पूछ ही लिया
कि उन्होंने उस चिड़िया को इतनी आश्चर्य भरी
नजर से क्यों देखा था। यम देव बोले "गरुड़ जब मैंने
उस चिड़िया को देखा तो मुझे ज्ञात हुआ कि वो
चिड़िया कुछ ही पल बाद यहाँ से हजारों कोस दूर
एक नाग द्वारा खा ली जाएगी। मैं सोच रहा था
कि वो इतनी जलदी इतनी दूर कैसे जाएगी, पर अब
जब वो यहाँ नहीं है तो निश्चित ही वो मर चुकी
होगी।"
गरुड़ समझ गये "मृत्यु टाले नहीं टलती चाहे कितनी
भी चतुराई की जाए।"
इस लिए कृष्ण कहते है।
करता तू वह है
जो तू चाहता है
परन्तु होता वह है
जो में चाहता हूँ
कर तू वह
जो में चाहता हूँ
फिर होगा वो
जो तू चाहेगा ।
जीवन के 6 सत्य:-
1. कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कितने खूबसूरत हैं ?
क्योंकि..लँगूर और गोरिल्ला भी अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित कर लेते हैं..
2. कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका शरीर कितना विशाल और मज़बूत है ?
क्योंकि...श्मशान तक आप अपने आपको नहीं ले जा सकते....
3. आप कितने भी लम्बे क्यों न हों , मगर आने वाले कल को आप नहीं देख सकते....
4. कोई फर्क नहीं पड़ता कि , आपकी त्वचा कितनी गोरी और चमकदार है
क्योंकि...अँधेरे में रोशनी की जरूरत पड़ती ही है...
5 . कोई फर्क नहीं पड़ता कि " आप " नहीं हँसेंगे तो सभ्य कहलायेंगे ?
क्यूंकि ..." आप " पर हंसने के लिए दुनिया खड़ी है ?
6. कोई फर्क नहीं पड़ता कि ,आप कितने अमीर हैं ? और दर्जनों गाड़ियाँ आपके पास हैं ?
क्योंकि...घर के बाथरूम तक आपको चल के ही जाना पड़ेगा...
इसलिए संभल के चलिए ... ज़िन्दगी का सफर छोटा है , हँसते हँसते काटिये , आनंद आएगा ।।
*जय श्री कृष्ण

Wednesday, 4 July 2018

इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके

*इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके❗*

एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करती थी❗
गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के भी खूब खुश थी❗
क्यों कि उसके मालिक, जंगल के राजा शेर ने उसे दस बोरी अखरोट देने का वादा कर रखा था❗
गिलहरी काम करते करते थक जाती थी तो सोचती थी , कि थोडी आराम कर लूँ , वैसे ही उसे याद आता कि शेर उसे दस बोरी अखरोट देगा❗
गिलहरी फिर काम पर लग जाती❗
गिलहरी जब दूसरे गिलहरीयों को खेलते देखती थी, तो उसकी
भी इच्छा होती थी कि मैं भी खेलूं , पर उसे अखरोट याद आ जाता, और वो फिर काम पर लग जाती❗
*ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना चाहता था, शेर बहुत ईमानदार था।*
ऐसे ही समय बीतता रहा ....
एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट दे कर आज़ाद कर दिया❗
*गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने लगी कि अब अखरोट मेरे किस काम के❓*
पूरी जिन्दगी काम करते - करते दाँत तो घिस गये, इन्हें खाऊँगी कैसे❗
*यह कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है❗*
इन्सान अपनी इच्छाओं का त्याग करता है,
पूरी ज़िन्दगी नौकरी, व्योपार, और धन कमाने में बिता देता है❗
*60 वर्ष की उम्र में जब वो सेवा निवृत्त होता है, तो उसे उसका जो फन्ड मिलता है, या बैंक बैलेंस होता है, तो उसे भोगने की क्षमता खो चुका होता है❗*
तब तक जनरेशन बदल चुकी होती है,
परिवार को चलाने वाले बच्चे आ जाते है❗
क्या इन बच्चों को इस बात का अन्दाजा लग पायेगा की इस फन्ड, इस बैंक बैलेंस के लिये : -
      *कितनी इच्छायें मरी होंगी❓*
      *कितनी तकलीफें मिली होंगी❓*
       *कितनें सपनें अधूरे रहे होंगे❓*
क्या फायदा ऐसे फन्ड का, बैंक  बैलेंस का, जिसे पाने के लिये पूरी ज़िन्दगी लग जाये और मानव उसका
भोग खुद न कर सके❗
*इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके❗*
इस लिए हर पल को खुश होकर जियो व्यस्त रहो,
पर साथ में मस्त रहो सदा स्वस्थ रहो❗
                    मौज लो, रोज लो❗
              नहीं मिले तो खोज लो‼
   BUSY पर BE-EASY भी रहो❗

आओ देखे समस्या कहां है

*आओ देखे समस्या कहां है।*
*कुछ समझने की कोशिश करें बलात्कार अचानक इस देश मे क्यो बढ़ गए ???*
कुछ उद्धरण से समझते हैं
1) लोग कहते हैं कि रेप क्यों होता है ?
एक 8 साल का लडका सिनेमाघर मे राजा हरिशचन्द्र फिल्म देखने गया और फिल्म से प्रेरित होकर उसने सत्य का मार्ग चुना और वो बडा होकर महान व्यक्तित्व से जाना गया।
परन्तु आज 8 साल का लडका टीवी पर क्या देखता है ?
सिर्फ नंगापन और अश्लील वीडियो और फोटो,
मैग्जीन में अर्धनग्न फोटो,
पडोस मे रहने वाली भाभी के छोटे कपडे !!
लोग कहते हैं कि रेप का कारण बच्चों की मानसिकता है।
पर वो मानसिकता आई कहा से ?
उसके जिम्मेदार कहीं न कहीं हम खुद जिम्मेदार है।
क्योंकि हम *joint family नही रहते।*
हम अकेले रहना पसंद करते हैं। और अपना परिवार चलाने के लिये माता पिता को बच्चों को अकेला छोड़कर काम पर जाना है और बच्चे अपना अकेलापन दूर करने के लिये टीवी और इन्टरनेट का सहारा लेते हैं।
और उनको देखने के लिए क्या मिलता है सिर्फ वही अश्लील वीडियो और फोटो तो वो क्या सीखेंगे यही सब कुछ ना ?
अगर वही बच्चा अकेला न रहकर अपने दादा दादी के साथ रहे तो कुछ अच्छे संस्कार सीखेगा।
कुछ हद तक ये भी जिम्मेदार है।
2) पूरा देश रेप पर उबल रहा है,
छोटी छोटी बच्चियो से जो दरिंदगी हो रही उस पर सबके मन मे गुस्सा है।
कोई सरकार को कोस रहा,
कोई समाज को तो कई feminist सारे लड़को को बलात्कारी घोषित कर चुकी है !
लेकिन आप सुबह से रात तक
कई बार sunny leon के कंडोम के add देखते है ..!!
फिर दूसरे add में  रणवीर सिंह शैम्पू के ऐड में लड़की पटाने के तरीके बताता है...!!
ऐसे ही Close up,
लिम्का,
Thumsup भी दिखाता है। *लेकिन तब आपको गुस्सा नही आता है है ना ???*
आप अपने छोटे बच्चों के साथ music चैनल पर सुनते ही हैं
*दारू बदनाम कर दी,*
*कुंडी मत खड़काओ राजा,*
*मुन्नी बदनाम,*
*चिकनी चमेली,*
*झण्डू बाम,*
*तेरे साथ करूँगा गन्दी बात,*
और न जाने ऐसी कितनी मूवीज गाने देखते सुनते है।
*तब आपको गुस्सा नही आता ??*
मम्मी बच्चों के साथ Star Plus, जी TV, सोनी TV देखती है जिसमें एक्टर और एक्ट्रेस सुहाग रात मनाते है।
किस करते है।
आँखो में आँखे डालते है।
और तो और भाभीजी घर पर है, जीजाजी छत पर है,
टप्पू के पापा और बबिता जिसमे एक व्यक्ति दूसरे की पत्नी के पीछे घूमता लार टपकता नज़र आएगा
पूरे परिवार के साथ देखते है।
*इन सब serial को देखकर आपको गुस्सा नही आता ??*
फिल्म्स आती है जिसमे किस (चुम्बन, आलिंगन), रोमांस से लेकर गंदी कॉमेडी आदि सब कुछ दिखाया जाता है।
*पर आप बड़े मजे लेकर देखते है, इन सब को देखकर आपको गुस्सा नही आता ??*
खुलेआम TV- फिल्म वाले आपके बच्चों को बलात्कारी बनाते है।
उनके मन मे जहर घोलते है।
तब आपको गुस्सा नही आता ?
क्योकि आपको लगता है कि
रेप रोकना सरकार की जिम्मेदारी है ।
पुलिस,
प्रशासन,
न्यायव्यवस्था की जिम्मेदारी है..
लेकिन क्या समाज और मीडिया की कोई जिम्मेदारी नही।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कुछ भी परोस दोगे क्या ?
आप तो अखबार पढ़कर।
News देखकर बस गुस्सा निकालेंगे।
कोसेंगे सिस्टम को,
सरकार को,
पुलिस को,
प्रशासन को,
DP बदल लेंगे,
सोशल मीडिया पे खूब हल्ला मचाएंगे,
बहुत ज्यादा हुआ तो कैंडल मार्च या धरना कर लेंगे लेकिन....
TV चैनल्स, वालीवुड, मीडिया को कुछ नही कहेंगे। क्योकि वो आपके मनोरंजन के लिए है।
सच पुछिऐ तो TV Channels अश्लीलता परोस रहे है ...
पाखंड परोस रहे है,
झूंठे विषज्ञापन परोस रहे है ,
झूंठेऔर सत्य से परे ज्योतिषी पाखंड से भरी कहानियां एवं मंत्र, ताबीज आदि परोस रहै है।
उनकी भी गलती नही है।
क्योंकि आप खरीददार हो .....??
बाबा बंगाली, तांत्रिक बाबा, स्त्री वशीकरण के जाल में खुद फंसते हो ।
3) अभी टीवी का खबरिया चैनल मंदसौर के गैंगरेप की घटना पर समाचार चला रहा है।
जैसे ही ब्रेक आये:-
*पहला विज्ञापन बोडी स्प्रे का जिसमे लड़की आसमान से गिरती है,*
*दूसरा कंडोम का,*
*तीसरा नेहा स्वाहा-स्नेहा स्वाहा वाला,*
*और चौथा प्रेगनेंसी चेक करने वाले मशीन का......*
जब हर विज्ञापन, हर फिल्म में नारी को केवल भोग की वस्तु समझा जाएगा तो बलात्कार के ऐसे मामलों को बढ़ावा मिलना निश्चित है।
क्योंकि
"हादसा एक दम नहीं होता,
वक़्त करता है परवरिश बरसों....!"
ऐसी निंदनीय घटनाओं के पीछे निश्चित तौर पर भी बाजारवाद ही ज़िम्मेदार है ..
4) आज सोशल मीडिया, इंटरनेट और फिल्मों में @ पोर्न परोसा जा रहा है। तो बच्चे तो बलात्कारी ही बनेंगे ना।

*ध्यान रहे समाज और मीडिया को बदले बिना ये आपके कठोर सख्त कानून कितने ही बना लीजिए, ये घटनाएं नही रुकने वाली है।*
इंतज़ार कीजिये बहुत जल्द आपको फिर केंडल मार्च निकालने का अवसर हमारा स्वछंद समाज, बाजारू मीडिया और गंदगी से भरा सोशल मिडीया देने वाला है ।
*अगर अब भी आप बदलने की शुरुआत नही करते हैं तो समझिए कि ......*
*फिर कोई भारत की बेटी निर्भया एवम् अन्य बेटियों की तरह बर्बाद होने वाली है।*
*आपको आपकी बेटियां बचना है तो सरकार कानून पुलिस के भरोसे से बाहर निकलकर समाज मीडिया और सोशल मीडिया की गंदगी साफ करने की आवश्यकता है।*
अगर किसी को यह बात
 अच्छी लगी हो तो प्लीज शेयर अवश्य करे ।

वसीयत और नसीहत

.       ध्यान से पढ़ना बहुत कुछ सीखने को मिलेगा 
   *"वसीयत और नसीहत"*
एक दौलतमंद इंसान ने अपने बेटे को वसीयत देते हुए कहा,
*"बेटा मेरे मरने के बाद मेरे पैरों में ये फटे हुऐ मोज़े (जुराबें) पहना देना, मेरी यह इक्छा जरूर पूरी करना ।*
पिता के मरते ही नहलाने के बाद, बेटे ने पंडितजी से पिता की आखरी इक्छा बताई ।
*पंडितजी ने कहा: हमारे धर्म में कुछ भी पहनाने की इज़ाज़त नही है।*
पर बेटे की ज़िद थी कि पिता की आखरी इक्छ पूरी हो ।
बहस इतनी बढ़ गई की शहर के पंडितों को जमा किया गया, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला ।
*इसी माहौल में एक व्यक्ति आया, और आकर बेटे के हाथ में पिता का लिखा हुआ खत दिया, जिस में पिता की नसीहत लिखी थी*
_*"मेरे प्यारे बेटे"*_
*देख रहे हो..? दौलत, बंगला, गाड़ी और बड़ी-बड़ी फैक्ट्री और फॉर्म हाउस के बाद भी, मैं एक फटा हुआ मोजा तक नहीं ले जा सकता ।*
*एक रोज़ तुम्हें भी मृत्यु आएगी, आगाह हो जाओ, तुम्हें भी एक सफ़ेद कपडे में ही जाना पड़ेगा ।*
*लिहाज़ा कोशिश करना,पैसों के लिए किसी को दुःख मत देना, ग़लत तरीक़े से पैसा ना कमाना, धन को धर्म के कार्य में ही लगाना ।*
*सबको यह जानने का हक है कि शरीर छूटने के बाद सिर्फ कर्म ही साथ जाएंगे"। लेकिन फिर भी आदमी तब तक धन के पीछे भागता रहता है जब तक उसका निधन नहीं हो जाता।*
* 1) जो आपसे दिल से बात करता है उसे कभी दिमाग से जवाब मत देना।*
* 2) एक साल मे 50 मित्र बनाना आम बात है। 50 साल तक एक मित्र से मित्रता निभाना खास बात है।*
* 3) एक वक्त था जब हम सोचते थे कि हमारा भी वक्त आएगा और एक ये वक्त है कि हम सोचते हैं कि वो भी क्या वक्त था।*
* 4) एक मिनट मे जिन्दगी नहीं बदलती पर एक मिनट सोच कर लिखा फैसला पूरी जिन्दगी बदल देता है।*
* 5) आप जीवन में कितने भी ऊॅचे क्यों न उठ जाएं, पर अपनी गरीबी और कठिनाई को कभी मत भूलिए।*
* 6) वाणी में भी अजीब शक्ति होती है। कड़वा बोलने वाले का शहद भी नहीं बिकता और मीठा बोलने वाले की मिर्ची भी बिक जाती है।*
* 7) जीवन में सबसे बड़ी खुशी उस काम को करने में है जिसे लोग कहते हैं कि तुम नही कर सकते हो।*
* 8) इंसान एक दुकान है और जुबान उसका ताला। ताला खुलता है, तभी मालूम होता है कि दुकान सोने की है या कोयले की।*
* 9) कामयाब होने के लिए जिन्दगी में कुछ ऐसा काम करो कि लोग आपका नाम Face book पे नही Google पे सर्च करें।*
* 10) दुनिया विरोध करे तुम डरो मत, क्योंकि जिस पेङ पर फल लगते है दुनिया उसे ही पत्थर मारती है।*
* 11) जीत और हार आपकी सोच पर ही निर्भर है। मान लो तो हार होगी और ठान लो तो जीत होगी।*
* 12) दुनिया की सबसे सस्ती चीज है सलाह, एक से मांगो हजारो से मिलती है। सहयोग हजारों से मांगो एक से मिलता है।*
* 13) मैने धन से कहा कि तुम एक कागज के टुकड़े हो। धन मुस्कराया और बोला बिल्कुल मैं एक कागज का टुकड़ा हूँ, लेकिन मैने आज तक जिंदगी में कूड़ेदान का मुंह नहीं देखा।*
* 14) आंधियों ने लाख बढ़ाया हौसला धूल का, दो बूंद बारिश ने औकात बता दी।*
* 15) जब एक रोटी के चार टुकड़े हों और खाने वाले पांच हों, तब मुझे भूख नहीं है, ऐसा कहने वाला कौन है.? सिर्फ "माँ"।*
* 16) जब लोग आपकी नकल करने लगें तो समझ लेना चाहिए कि आप जीवन में सफल हो रहे हैं।*
* 17) मत फेंक पत्थर पानी में, उसे भी कोई पीता है।*
*मत रहो यूं उदास जिन्दगी में, तुम्हें देखकर भी कोई जीता है*।।
अच्छा लगे तो औरों को भी भेजें


एक मित्र ने भेजा था सन्देश

एक मित्र ने भेजा था पसंद आया तो आप सब के बीच रख रहा हुं
थोड़ा समय लगेगा लेकिन पढ़ना जरूर, आंसू आ जाए तो जान लेना आपकी भावनाएं जीवित हैं ....
बात बहुत पुरानी है।
.
आठ-दस साल पहले की है  ।
मैं अपने एक मित्र का पासपोर्ट बनवाने के लिए दिल्ली के पासपोर्ट ऑफिस गया था।
उन दिनों इंटरनेट पर फार्म भरने की सुविधा नहीं थी। पासपोर्ट दफ्तर में दलालों का बोलबाला था
.
और खुलेआम दलाल पैसे लेकर पासपोर्ट के फार्म बेचने से लेकर उसे भरवाने, जमा करवाने और पासपोर्ट बनवाने का काम करते थे।
मेरे मित्र को किसी कारण से पासपोर्ट की जल्दी थी, लेकिन दलालों के दलदल में फंसना नहीं चाहते थे।
हम पासपोर्ट दफ्तर पहुंच गए, लाइन में लग कर हमने पासपोर्ट का तत्काल फार्म भी ले लिया।
.
पूरा फार्म भर लिया। इस चक्कर में कई घंटे निकल चुके थे, और अब हमें िकसी तरह पासपोर्ट की फीस जमा करानी थी।
हम लाइन में खड़े हुए लेकिन जैसे ही हमारा नंबर आया बाबू ने खिड़की बंद कर दी और कहा कि समय खत्म हो चुका है अब कल आइएगा।
मैंने उससे मिन्नतें की, उससे कहा कि आज पूरा दिन हमने खर्च किया है और बस अब केवल फीस जमा कराने की बात रह गई है, कृपया फीस ले लीजिए।
बाबू बिगड़ गया। कहने लगा, "आपने पूरा दिन खर्च कर दिया तो उसके लिए वो जिम्मेदार है क्या? अरे सरकार ज्यादा लोगों को बहाल करे। मैं तो सुबह से अपना काम ही कर रहा हूं।"
मैने बहुत अनुरोध किया पर वो नहीं माना। उसने कहा कि बस दो बजे तक का समय होता है, दो बज गए। अब कुछ नहीं हो सकता।
मैं समझ रहा था कि सुबह से दलालों का काम वो कर रहा था, लेकिन जैसे ही बिना दलाल वाला काम आया उसने बहाने शुरू कर दिए हैं।
.
पर हम भी अड़े हुए थे कि बिना अपने पद का इस्तेमाल किए और बिना उपर से पैसे खिलाए इस काम को अंजाम देना है।
मैं ये भी समझ गया था कि अब कल अगर आए तो कल का भी पूरा दिन निकल ही जाएगा, क्योंकि दलाल हर खिड़की को घेर कर खड़े रहते हैं, और आम आदमी वहां तक पहुंचने में बिलबिला उठता है।
खैर, मेरा मित्र बहुत मायूस हुआ और उसने कहा कि चलो अब कल आएंगे।
मैंने उसे रोका। कहा कि रुको एक और कोशिश करता हूं।
बाबू अपना थैला लेकर उठ चुका था। मैंने कुछ कहा नहीं, चुपचाप उसके-पीछे हो लिया। वो उसी दफ्तर में तीसरी या चौथी मंजिल पर बनी एक कैंटीन में गया, वहां उसने अपने थैले से लंच बॉक्स निकाला और धीरे-धीरे अकेला खाने लगा।
मैं उसके सामने की बेंच पर जाकर बैठ गया। उसने मेरी ओर देखा और बुरा सा मुंह बनाया। मैं उसकी ओर देख कर मुस्कुराया। उससे मैंने पूछा कि रोज घर से खाना लाते हो?
उसने अनमने से कहा कि हां, रोज घर से लाता हूं।
मैंने कहा कि तुम्हारे पास तो बहुत काम है, रोज बहुत से नए-नए लोगों से मिलते होगे?
वो पता नहीं क्या समझा और कहने लगा कि हां मैं तो एक से एक बड़े अधिकारियों से मिलता हूं।
कई आईएएस, आईपीएस, विधायक और न जाने कौन-कौन रोज यहां आते हैं। मेरी कुर्सी के सामने बड़े-बड़े लोग इंतजार करते हैं।
मैंने बहुत गौर से देखा, ऐसा कहते हुए उसके चेहरे पर अहं का भाव था।
मैं चुपचाप उसे सुनता रहा।
फिर मैंने उससे पूछा कि एक रोटी तुम्हारी प्लेट से मैं भी खा लूं? वो समझ नहीं पाया कि मैं क्या कह रहा हूं। उसने बस हां में सिर हिला दिया।
मैंने एक रोटी उसकी प्लेट से उठा ली, और सब्जी के साथ खाने लगा।
वो चुपचाप मुझे देखता रहा। मैंने उसके खाने की तारीफ की, और कहा कि तुम्हारी पत्नी बहुत ही स्वादिष्ट खाना पकाती है।
वो चुप रहा।
मैंने फिर उसे कुरेदा। तुम बहुत महत्वपूर्ण सीट पर बैठे हो। बड़े-बड़े लोग तुम्हारे पास आते हैं। तो क्या तुम अपनी कुर्सी की इज्जत करते हो?
अब वो चौंका। उसने मेरी ओर देख कर पूछा कि इज्जत? मतलब?
मैंने कहा कि तुम बहुत भाग्यशाली हो, तुम्हें इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है, तुम न जाने कितने बड़े-बड़े अफसरों से डील करते हो, लेकिन तुम अपने पद की इज्जत नहीं करते।
उसने मुझसे पूछा कि ऐसा कैसे कहा आपने? मैंने कहा कि जो काम दिया गया है उसकी इज्जत करते तो तुम इस तरह रुखे व्यवहार वाले नहीं होते।
देखो तुम्हारा कोई दोस्त भी नहीं है। तुम दफ्तर की कैंटीन में अकेले खाना खाते हो, अपनी कुर्सी पर भी मायूस होकर बैठे रहते हो,
.
लोगों का होता हुआ काम पूरा करने की जगह अटकाने की कोशिश करते हो।
मान लो कोई एकदम दो बजे ही तुम्हारे काउंटर पर पहुंचा तो तुमने इस बात का लिहाज तक नहीं किया कि वो सुबह से लाइऩ में खड़ा रहा होगा,
और तुमने फटाक से खिड़की बंद कर दी। जब मैंने तुमसे अनुरोध किया तो तुमने कहा कि सरकार से कहो कि ज्यादा लोगों को बहाल करे।
मान लो मैं सरकार से कह कर और लोग बहाल करा लूं, तो तुम्हारी अहमियत घट नहीं जाएगी?
.
हो सकता है तुमसे ये काम ही ले लिया जाए। फिर तुम कैसे आईएएस, आईपीए और विधायकों से मिलोगे?
भगवान ने तुम्हें मौका दिया है रिश्ते बनाने के लिए। लेकिन अपना दुर्भाग्य देखो, तुम इसका लाभ उठाने की जगह रिश्ते बिगाड़ रहे हो।
मेरा क्या है, कल भी आ जाउंगा, परसों भी आ जाउंगा। ऐसा तो है नहीं कि आज नहीं काम हुआ तो कभी नहीं होगा। तुम नहीं करोगे कोई और बाबू कल करेगा।
पर तुम्हारे पास तो मौका था किसी को अपना अहसानमंद बनाने का। तुम उससे चूक गए।
वो खाना छोड़ कर मेरी बातें सुनने लगा था।
मैंने कहा कि पैसे तो बहुत कमा लोगे, लेकिन रिश्ते नहीं कमाए तो सब बेकार है।
.
क्या करोगे पैसों का? अपना व्यवहार ठीक नहीं रखोगे तो तुम्हारे घर वाले भी तुमसे दुखी रहेंगे। यार दोस्त तो नहीं हैं,
ये तो मैं देख ही चुका हूं। मुझे देखो, अपने दफ्तर में कभी अकेला खाना नहीं खाता।
यहां भी भूख लगी तो तुम्हारे साथ खाना खाने आ गया। अरे अकेला खाना भी कोई ज़िंदगी है?
मेरी बात सुन कर वो रुंआसा हो गया। उसने कहा कि आपने बात सही कही है साहब। मैं अकेला हूं। पत्नी झगड़ा कर मायके चली गई है।
.
बच्चे भी मुझे पसंद नहीं करते। मां है, वो भी कुछ ज्यादा बात नहीं करती। सुबह चार-पांच रोटी बना कर दे देती है, और मैं तनहा खाना खाता हूं।
.
रात में घर जाने का भी मन नहीं करता। समझ में नहींं आता कि गड़बड़ी कहां है?
मैंने हौले से कहा कि खुद को लोगों से जोड़ो। किसी की मदद कर सकते तो तो करो।
.
देखो मैं यहां अपने दोस्त के पासपोर्ट के लिए आया हूं। मेरे पास तो पासपोर्ट है।
मैंने दोस्त की खातिर तुम्हारी मिन्नतें कीं। निस्वार्थ भाव से। इसलिए मेरे पास दोस्त हैं, तुम्हारे पास नहीं हैं।
वो उठा और उसने मुझसे कहा कि आप मेरी खिड़की पर पहुंचो। मैं आज ही फार्म जमा करुंगा।
मैं नीचे गया, उसने फार्म जमा कर लिया, फीस ले ली। और हफ्ते भर में पासपोर्ट बन गया।
बाबू ने मुझसे मेरा नंबर मांगा, मैंने अपना मोबाइल नंबर उसे दे दिया और चला आया।
कल दिवाली पर मेरे पास बहुत से फोन आए। मैंने करीब-करीब सारे नंबर उठाए। सबको हैप्पी दिवाली बोला।
उसी में एक नंबर से फोन आया, "रविंद्र कुमार चौधरी बोल रहा हूं साहब।"
मैं एकदम नहीं पहचान सका। उसने कहा कि कई साल पहले आप हमारे पास अपने किसी दोस्त के पासपोर्ट के लिए आए थे, और आपने मेरे साथ रोटी भी खाई थी।
आपने कहा था कि पैसे की जगह रिश्ते बनाओ।
मुझे एकदम याद आ गया। मैंने कहा हां जी चौधरी साहब कैसे हैं?
उसने खुश होकर कहा, "साहब आप उस दिन चले गए, फिर मैं बहुत सोचता रहा।
.
मुझे लगा कि पैसे तो सचमुच बहुत लोग दे जाते हैं, लेकिन साथ खाना खाने वाला कोई नहीं मिलता।
.
सब अपने में व्यस्त हैं। मैं
साहब अगले ही दिन पत्नी के मायके गया, बहुत मिन्नतें कर उसे घर लाया। वो मान ही नहीं रही थी।
वो खाना खाने बैठी तो मैंने उसकी प्लेट से एक रोटी उठा ली,
कहा कि साथ खिलाओगी? वो हैरान थी।
रोने लगी। मेरे साथ चली आई। बच्चे भी साथ चले आए।
साहब अब मैं पैसे नहीं कमाता। रिश्ते कमाता हूं। जो आता है उसका काम कर देता हूं।
साहब आज आपको हैप्पी दिवाली बोलने के लिए फोन किया है।
अगल महीने बिटिया की शादी है। आपको आना है।
अपना पता भेज दीजिएगा। मैं और मेरी पत्नी आपके पास आएंगे।
मेरी पत्नी ने मुझसे पूछा था कि ये पासपोर्ट दफ्तर में रिश्ते कमाना कहां से सीखे?
तो मैंने पूरी कहानी बताई थी। आप किसी से नहीं मिले लेकिन मेरे घर में आपने रिश्ता जोड़ लिया है।
सब आपको जानते है बहुत दिनों से फोन करने की सोचता था, लेकिन हिम्मत नहीं होती थी।
आज दिवाली का मौका निकाल कर कर रहा हूं। शादी में आपको आना है।
.
बिटिया को आशीर्वाद देने। रिश्ता जोड़ा है आपने। मुझे यकीन है आप आएंगे।
वो बोलता जा रहा था, मैं सुनता जा रहा था। सोचा नहीं था कि सचमुच उसकी ज़िंदगी में भी पैसों पर रिश्ता भारी पड़ेगा।
लेकिन मेरा कहा सच साबित हुआ। आदमी भावनाओं से संचालित होता है। कारणों से नहीं। कारण से तो मशीनें चला करती हैं
पसंद आए तो अपनें अज़ीज़ दोस्तों को जरुर भेजें एंव इनसांनीयत की भावना को आगे बढ़ाएँ
पैसा इन्सान के लिए बनाया गया है, इन्सान पैैसै के लिए नहीं बनाया गया है!!
""" जिंदगी में किसी का साथ ही काफी है,, कंधे पर रखा हुआ हाथ ही काफी है,,,,
.
दूर हो या पास क्या फर्क पड़ता है,, क्योंकि अनमोल रिश्तों का तो बस एहसास ही काफी है *** । ।
अगर आपके दिल को छुआ हो तो इस मैसेज से कुछ सीखने की कोशिश करना ,,
      शायद आपकी दुनिया भी बदल जाये ।।।
*अगर मरने के बाद भी जीना चाहो तो एक काम जरूर करना, पढ़ने लायक कुछ लिख जाना या लिखने लायक कुछ कर जाना I
.
याद रखना, पैसा तो सबके पास हैं, किसी के पास कम है, तो किसी के पास ज्यादा है,ये सोचो कि रिश्ते किसके ज्यादा है।।


जिन्दगी का समीकरण

समीकरण !-- मैंने काफ़ी लंबे समय से जितने भी समीकरण पढ़े ये सबसे बढ़िया लगा!!!
समीकरण 1--
इंसान = खाना + सोना + काम + आनंद
गधा = खाना + सोना + काम
इस तरह:
इंसान = गधा + आनन्द
इस तरह से:
इंसान - आनंद = गधा
शब्दों में बताऊँ तो,
एक इंसान जो नहीं जानता कि आनंद कैसे लेना चाहिए वो एक गधे के समान होता है।
समीकरण 2
इंसान = खाना + सोना + पैसा कमाना
गधा = खाना + सोना
इस तरह:
इंसान = गधा + पैसा कमाना
इस तरह से:
इंसान - पैसा कमाना = गधा
शब्दों में,
इंसान जो पैसा नहीं कमाता = गधा
समीकरण 3
औरत = खाना + नींद + खर्च करने वाली
गधा = खाना + नींद
इस तरह से:✋
औरत = गधा + खर्च करने वाली
औरत - खर्च करने वाली = गधा
दूसरे शब्दों में,
औरत जो ख़र्चा नहीं करती वो गधे के समान है
समीकरण 1 व 2 का निष्कर्ष:
पुरुष जो पैसा नहीं कमाता = औरत जो ख़र्चा नहीं करती।邏
इसलिए पुरुष पैसा कमाता है ताकि औरत गधा ना बने।
और औरत इसलिए पैसा खर्च करती है ताकि पुरुष गधा ना रहे
इसलिए अब हमारे पास है:
पुरुष + औरत = गधा + पैसा कमाना + गधा + पैसा खर्च करना।
इस प्रकार,
1 व 2 से, हम समझ सकते हैं कि,
पुरूष + औरत = 2 गधे, जो कि पैसा कमाने और खर्च करने के लिए आनंदपूर्वक साथ साथ रहते हैं 
मैथ्स के स्टूडेंट प्लीज इसे चेक और
वेरिफाइ करें 

Thursday, 18 January 2018

हूनर के साथ रोजगार के अवसर पायें

हूनर के साथ रोजगार के अवसर पायें

नि:शुल्क रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण हेतु आज ही आवेदन करें 
कृपया इस लिंक को आगे भेजते रहे जिस से की किसी जरुरत मंद को प्रशिक्षण व रोज़गार का लाभ मिल सके !
लिंक पर क्लिक करे और फॉर्म भर कर सबमिट करें।

सिमित सिटे ! 

Wednesday, 17 January 2018

Fauj me mauj hai

फौज में मौज है


फौज में मौज है;
हजार रूपये रोज है;
थोड़ा सा गम है;
इसके लिए भी रम है;
ज़िंदगी थोड़ी रिस्की है;
इसके लिए तो व्हिस्की है;
खानें के बाद फ्रुट है;
मरनें के बाद सैलूट है;
पहनने के लिए ड्रैस है;
ड्रैस में जरूरी प्रेस है;
सुवह-सुबह पी.टी है;
वॉर्निग के लिए सीटी है;
चलने के लिए रूट है;
पहनने के लिए D.M.S बूट है;
खाने के लिए रिफ्रैशमेंन्ट है;
गलती करो तो पनिशमेंट है;
जीते-जी टेंशन है;
मरने के बाद पेंशन है।
‬: कहते हैं फौजी आधे पागल होते हैं.
.सही कहते हैं..पागल होना भी चाहिये..
वर्ना किसमें इतना दम होगा जो
-60° के ग्लेसियर में..और
+55° के रेगिस्तान में दुश्मन के आगे सीना चौड़ा करके खड़ा हो जाएगा..
— ये हर किसी के बस की बात नही!
 
*# INDIAN ARMY#*
जमीन की कीमत और
*फौज की  हिम्मत*
कभी कम नहीं हो ...सकती
दिल तो आशिक तोडते है साहब.......
हम तो सरहद के रखवाले हैं... Record तोडते हैं
अंजाम की फिक्र
तो कायरों को होती है,  
हम तो *_ARMY_*वाले है, 
जहाँ *_Risk_* होती है, वहाँ हमारी *_Entry Fix_*  होती है....

जय जवान जय किसान

*कैसे सोती होगी वो हर माँ*
_जिसे पता है की सीमा पर उसका बेटा खड़ा हैं _
*कैसे कमाता होगा वो हर पिता*
_जिसका बेटा दुश्मन के सामने खड़ा हैं_
*केसे चहकती होगी वो हर बहन*
_जिसके भाई का इंतजार बंदूक की हर गोली कर रही हैं _
*कैसे काम करता होगा वो हर भाई*
_जो उसके आने का इंतजार कर रहा हो_
*कैसे जीती होगी वो नारी*
_जिसका सिंदूर कभी भी मिट सकता हे_
*कैसे रहते होंगे वो हर दोस्त*
_जिनका यार कभी भी तिरंगे में लिपटा आ सकता हैं......._Ek Sipahi✍✍
अच्छा लगे तो आगे भेजे *

SALUTE INDIAN ARMY

श्रमिक (मजदुर) कार्ड के फायदे

*श्रमिक (मजदुर) कार्ड के फायदे*

वर्तमान (2017-18) मे श्रमिक कार्ड बनाने से होने वाले फायदे :-
1. लड़के के जन्म पर 20 हजार रुपये,
लड़की के जन्म पर 21 हजार रूपये मिलेंगे 
(अधिकतम 2 बच्चों के जन्म पर )

2. 2 श्रमिक कार्डधारी के बच्चो को पढ़ाई में मिलने  वाली छात्रवर्ती
कक्षा 6 से 8         :- 8000 रुपये
कक्षा 9 से 12      :- 9000 रुपये
आईटीआई          :- 9000 रुपये
डिप्लोमा             :-10000 रुपये
बीए (BA)           :-13000 रुपये
एमए (MA)         :-15000 रुपये  की छात्रवर्ती पढ़ाई करने वाले छात्र (लड़के) को मिलेगी । लड़को को मिलने वाली राशि से 1000 रुपये अधिक छात्रा (लड़की) को मिलेगी ।
3. 2 लड़कियों  की शादी पर अथवा 18 वर्ष की उम्र होने पर दोनों को अलग अलग 55-55 हजार रूपये की  सरकारी सहायता मिलेगी।  (शादी के समय लड़की 8वीं पास हो, उम्र 18साल हो, घर मे शौचालय (टॉयलेट) हो, श्रमिक कार्ड बने हुए 1 साल हो गया हो )
अधिकतम 2 लड़कियों को ही मिलेगी

4. दुर्घटना होने पर  30 हजार से 5 लाख तक की सरकारी सहायता

*श्रमिक बनवाने की उम्र अवधि* :-
18 वर्ष से 58 वर्ष की उम्र तक कोई भी पुरुष या महिला ये श्रमिक कार्ड बनवा सकते हैं ।

*श्रमिक कार्ड बनवाने के लिये आवश्यक दस्तावेज* :-
राशन कार्ड, आधार कार्ड, पहचान पत्र,भामाशाह कार्ड, बैंक डायरी, फोटो रंगीन 2, नरेगा में काम किया हैं तो जॉब कार्ड,
90 दिन का कार्य अनुभव प्रमाण पत्र ,

सभी से निवेदन हे की कृपया इस जोरदार योजना का लाभ आमजन तक पहुंचाए ।।।